जरूरतमंदों के लिए काम करना चाहते हैं IAS परीक्षा में 43वां रैंक लाने वाले शुभम

जरूरतमंदों के लिए काम करना चाहते हैं IAS परीक्षा में 43वां रैंक लाने वाले शुभम

सिविल सर्विस परीक्षा में शुभम बंसल का यह तीसरा प्रयास था। पहली बार वह इंटरव्यू तक पहुंचे थे। दूसरे प्रयास में वह प्री क्वालिफाई नहीं कर पाए। तीसरी बार उनकी 43वीं रैंक आई। देश की सबसे मुश्किल परीक्षा पास करने पर शुभम ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है, मैं इसे अंत नहीं कहूंगा।

संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2019 में उत्तराखंड के रामनगर के शुभम बंसल को 43वीं रैंक प्राप्त हुई है। वह इस समय भारतीय रिजर्व बैंक, कानपुर में कार्यरत हैं। हिल-मेल के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी पढ़ाई, पारिवारिक माहौल के साथ-साथ सफलता तक के सफर के बारे में बातचीत की।

शुभम ने बताया कि उनका 4 लोगों का परिवार है। उनके पिता एक बिजनेसमैन हैं और मां गृहिणी हैं। उनकी एक बड़ी बहन है। वह रामनगर में पले-बढ़े। 5वीं तक उन्होंने श्री गुरु नानक पब्लिक स्कूल रामनगर में पढ़ाई की। 6-10वीं तक वह लिटिल स्कॉलर्स काशीपुर में पढ़े। उसके बाद 11-12 के लिए वह दिल्ली पब्लिक स्कूल आरके पुरम, नई दिल्ली चले गए।

2013 से 2017 तक उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 2019 में उन्होंने रिजर्व बैंक जॉइन किया।

माता-पिता, बहन और जीजा के साथ शुभम बंसल।

 

सिविल सर्विस परीक्षा में शुभम का यह तीसरा प्रयास था। पहली बार वह इंटरव्यू तक पहुंचे थे। दूसरे प्रयास में वह प्री क्वालिफाई नहीं कर पाए। तीसरी बार उनकी 43वीं रैंक आई। देश की सबसे मुश्किल परीक्षा पास करने पर शुभम ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है, मैं इसे अंत नहीं कहूंगा। मैं कुछ सोच कर निकला था कि कुछ अच्छा काम करेंगे। उन लोगों के लिए कुछ करना चाहता हूं, जो जरूरतमंद हैं। उम्मीद ये करता हूं कि एक दिन ऐसा आए कि कोई जरूरतमंद न हो। इस दिशा में काम करूंगा।

मेरी पढ़ाई में संघर्ष रहा, लेकिन मुझे लगता है कि ईश्वर का आशीर्वाद और आसपास वालों का सहयोग मिला, जिससे काफी मदद मिली। परिवार, अध्यापकों और साथ वालों ने काफी सहयोग किया। असफल रहने पर भी जज्बा बरकरार रहा। यह सोचकर चला कि आने वाले कल के बारे में सोचेंगे, जो बीत गया उसे पीछे छोड़ दो।

किस उम्र में आपने आईएएस बनने के बारे में सोचा? इस पर शुभम कहते हैं कि पांचवीं कक्षा में मेरे दिमाग में आया था। उस समय हम आसपास के लोगों से सुनते हैं कि आईएएस होता है। उस दौरान कई चीजें आईं फिर आईआईटी जाने के बारे में सोचा। फिर मैंने इंजीनियरिंग की। उस समय कई चीजें आईं दिमाग में। मास्टर्स करेंगे, साइंस के फील्ड में करियर बनाएंगे या रिसर्च करेंगे। लेकिन कॉलेज के शुरू में मुझे लगने लगा था कि नहीं, मैं अपने पुराने सपने को पूरा करूंगा। तीसरे और चौथे साल में वह भावना और दृढ़ हो गई। चौथे साल मैंने तैयारी की, जॉब के ऑफर मिले थे, मैंने नहीं लिया। मेरा वह फैसला सही रहा और अपनी तैयारी जारी रखी। शुभम ने भूगोल से परीक्षा पास की है और उनका मीडियम इंग्लिश रहा।

उत्तराखंड कैडर मिलने पर क्या करना चाहेंगे? इस पर शुभम ने कहा कि अगर मौका मिलता है तो वह मेरा गृह राज्य है तो मैं काफी अच्छा कर सकता हूं। मैं नियमों में रहकर लोगों की जरूरतों को पूरा कर सकता हूं।

सिविल सर्विसेज में असफल युवाओं को लेकर शुभम ने कहा कि काफी मुश्किल पल होता है पर मैं यही कहूंगा कि मैं भी इस फेज से गुजरा हूं। मुझे पता है पर इसके बाद हमें फिर से बाउंस बैक करना चाहिए क्योंकि कोई भी बच्चा जो फेल होता है वह काफी तैयारी कर चुका होता है, उसे उसी लेवल पर वापस आकर उसी मोटिवेशन के साथ थोड़ा और आगे निकलना होता है। सफलता खड़ी होती है बस पहुंचना होता है।

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