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त्रिवेंद्र सरकार सख्त, भ्रष्टाचार या काम खराब तो चीफ इंजीनियर से वसूली

हिल मेल ब्यूरो, देहरादून

उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। अब लोक निर्माण विभाग में सड़क या दूसरे निर्माण कार्यों में किसी तरह की गड़बड़ी पता चलती है तो अफसरों से भी वसूली की जाएगी। पहले के नियम के तहत ठेकेदारों से ही नुकसान या गबन की वसूली की जाती थी। सरकार ने यह भी तय कर दिया है कि नुकसान होने पर ठेकेदार सहित किस अफसर से कितनी भरपाई की जाएगी।

नई व्यवस्था के मुताबिक विभाग के जूनियर इंजीनियर से लेकर चीफ इंजीनियर तक को नुकसान की भरपाई अपनी जेब से करनी होगी। पहले अधिकारी ठेकेदार, जूनियर अधिकारी या किसी अन्य पर आरोप मढ़कर बच जाते थे। विभाग के नए नियम के मुताबिक गलत डिजायन के कारण होने वाले नुकसान की वसूली स्वीकृति देने वाले चीफ इंजीनियर, एससी या एक्सइएन तक से भी अब की जाएगी।

उच्च अधिकारियों का कहना है कि स्पष्ट रूप से आदेश होने के कारण कोर्ट कचहरियों के मामलों से भी निजात मिलेगी और अधिकारी भी लापरवाही नहीं करेंगे। आइए अब समझते हैं कि विभाग ने नई व्यवस्था क्या की है-

  • भंडार में गबन/नुकसान पर वसूली
  • जूनियर इंजीनियर से- 60 प्रतिशत
  • असिस्टेंट इंजीनियर से- 25 प्रतिशत
  • एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से- 15 प्रतिशत
  • स्टोर कीपर इंचार्ज है तो
  • स्टोर कीपर से- 35 प्रतिशत
  • जूनियर इंजीनियर- 25 प्रतिशत
  • असिस्टेंट इंजीनियर- 25 प्रतिशत
  • एक्जीक्यूटिव इंजीनियर- 15 प्रतिशत

इसी प्रकार अगर कुटाई के काम में गड़बड़ी सामने आई तो कुल सरकारी नुकसान का 75 प्रतिशत जूनियर इंजीनियर और 25 प्रतिशत असिस्टेंट इंजीनियर से वसूली की जाएगी। गलत डिजायन की बात करें तो स्वीकृति अगर चीफ इंजीनियर की है तो कुल नुकसान का 50 प्रतिशत चीफ इंजीनियर एवं एससी के बीच बराबर और बाकी बचे हिस्से में चीफ इंजीनियर और सहायक अभियंता से बराबर वसूली होगी।

स्वीकृति अगर एससी (अधीक्षण अभियंता) ने दी है तो कुल नुकसान का 50 प्रतिशत एससी से, शेष एससी और असिस्टेंट इंजीनियर से बराबर और अगर स्वीकृति एक्सईएन (अधिशासी अभियंता) ने दी है तो 50 प्रतिशत एक्सईएन से बाकी 50 प्रतिशत असिस्टेंट इंजीनियर से होगी।

पेंटिंग वर्क में इसी तरह का नया नियम बनाया गया है जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। इसके तहत 50 प्रतिशत ठेकेदार से, शेष आधी राशि का आधा जूनियर इंजीनियर से बाकी बची राशि का 35 प्रतिशत असिस्टेंट इंजीनियर से और 15 प्रतिशत एक्सईएन से वसूली होगी। पेंटिंग वर्क अगर प्लांट के जरिए किया गया है और ग्रेडिंग में कमी पाई गई है तो ठेकेदार, जूनियर इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और एक्सईएन से वसूली होगी।

एक गड़बड़ी एस्टीमेट में गलत आकलन के कारण ज्यादा स्वीकृति की भी होती है। ऐसी स्थिति में चीफ इंजीनियर ने स्वीकृति दी हो तो चीफ इंजीनियर और एससी पर कुल नुकसान का 50 प्रतिशत, दोनों से बराबर वसूला जाएगा। अगर एससी ने स्वीकृति दी हो तो नुकसान का 50 प्रतिशत एससी से वसूला जाएगा और बाकी का अन्य अधिकारियों से वहीं, एक्सईएन ने स्वीकृति दी है तो नुकसान का 50 प्रतिशत एक्सईएन से और बाकी का अन्य अधिकारियों से वसूला जाएगा।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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