वैश्विक महामारी कोरोना के चलते देश के हर हिस्से से उत्तराखंडी अपने घरों को वापस आए हैं। कोरोना काल में कई लोगों की नौकरियां चली गईं हैं। अब लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इस महामारी का कई लोगों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। सरकार की ओर से कुछ योजनाएं शुरू की गई हैं। लौटकर आए लोगों को अब पहाड़ों में ही रोके रखने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की शुरूआत हुई है। कई विभागों ने अपनी योजनाओं को इसके साथ संबद्ध किया है।
लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्तराखंड के डेयरी विभाग ने एक अच्छी की पहल की है। प्रवासी उत्तराखंडी अब अपने क्षेत्र में मिल्क पार्लर खोलकर काम शुरू कर सकते हैं। इसके लिए कुछ आवश्यक नियम और शर्तों को पूरा करना होगा।

डेयरी विभाग ने लोगों को एक सुनहरा अवसर दिया है। इस योजना के तहत बेरोजगारों को डेयरी पार्लर खुलवाने में मदद की जाएगी। नैनीताल में दुग्ध संघ ने मिल्क पार्लर योजना के तहत शुरुआती तौर पर 50 पार्लर खोलने की तैयारी की है। वहीं राज्य में ऐसे कुल 500 पार्लर खोलने की योजना है। हालांकि मिल्क पार्लर खोलने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें हैं। आवेदक के पास अपनी दुकान होनी जरूरी है। यानी किराए की दुकान वाले को फ्रेंचाइजी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही दुकान आबादी के बीच होनी चाहिए। जिससे दुग्ध उत्पादों की खपत ज्यादा और आसानी से हो सके। खपत बढ़ने के बाद ही विभाग पॉर्लरों की संख्या में बढ़ोत्तरी करेगा।
मिल्क पार्लर खोलने के कुछ शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा। पॉर्लर खोलेने के लिए कुल दो लाख रुपये का निवेश करना होगा। दुग्ध संघ द्वारा इस राशि पर 20 प्रतिशत का अनुदान देगा। एक लाख साठ हजार रुपये का कर्ज बैंक से मिल सकता है।


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