हिल मेल ब्यूरो, गैरसैंण
पहाड़ी क्षेत्र गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंडियों के मन की मुराद पूरी कर दी है और अब यहां सुविधाएं बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। सरकार का पहला प्लान है कि इस पूरे क्षेत्र को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर की तरह राज्य राजधानी क्षेत्र यानी एससीआर बनाया जाए।
इसमें चमोली के साथ पौड़ी और अल्मोड़ा के क्षेत्र भी शामिल किए जाएंगे। ऐसा करने से इस क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। गैरसैंण तहसील स्तर से उठकर विशेष श्रेणी में आ जाएगा। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य बनने से भी पहले से गैरसैंण को पहाड़ी क्षेत्र की अलग राजधानी बनाने की मांग उठ रही थी।
उत्तराखंड बना तो भी देहरादून को अस्थायी राजधानी के तौर पर घोषित किया गया और सरकार के सभी काम यहीं से शुरू हो गए। अब गैरसैंण को भी फिलहाल अस्थायी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया है। पहाड़ के आंदोलनकारियों की इच्छा के अनुरूप सरकार भी पहाड़ के क्षेत्र को विकसित करना चाहती है।
एक तरफ गैरसैंण को अस्थायी राजधानी घोषित करने के सरकार के फैसले की पूरे प्रदेश में तारीफ हो रही है। इसे स्थायी राजधानी बनने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। दूसरी तरफ सरकार को अब यहां राजधानी के हिसाब से विकास का खाका खींचना है। गैरसैंण समेत आसपास के इलाकों को एससीआर बनाने से राजधानी के मानकों को पूरा करना संभव हो सकेगा।
इसके बाद यहां अस्पताल, विश्वविद्यालय, स्कूल, पेयजल, उद्योग आदि से संबंधित योजनाएं तैयार कर काम शुरू होगा। शीर्ष अधिकारी सीएम रावत के घोषणा वाले दिन से ही इस पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद गैरसैंण को विकसित करने का काम तेजी से शुरू होगा।


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