कहते हैं जहां चाह, वहां राह। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण स्कूल बंद हैं। बच्चों को ऑनलाइन क्लासेज दी जा रही हैं। कुछ शिक्षकों ने दूसरे माध्यमों से भी बच्चों तक पहुंचने का प्रयास किया है। लेकिन इस संकटकाल में भी बच्चों की सृजनशीलता को विकसित करने के अभिनव प्रयोग हुए हैं। ऐसा ही एक प्रयोग है दीवार पत्रिका। हालांकि यह सिलसिला पांच साल पहले शुरू हो गया था लेकिन इसने कोरोना संक्रमण काल में नवाचार के नए आयाम स्थापित किए हैं।

अल्मोड़ा के धौलादेवी विकास खंड में बजेला में एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय है। दूसरे तमाम स्कूलों की तरह यह स्कूल भी कोरोना काल में बंद रहा। लेकिन यहां के शिक्षकों ने छात्रों को सिर्फ ऑनलाइन पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें दूसरी तमाम गतिविधियों में शामिल कराया, वह भी बिना संपर्क में आए। मई के महीने में इस स्कूल को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया। इस दौरान स्कूल पहुंचे शिक्षकों ने बच्चों, अभिभावकों को साथ लेकर दीवार पत्रिका का विचार आगे बढ़ाया। यहां के सहायक शिक्षक भास्कर जोशी और उनके मित्र राजेश पांडे ने बच्चों की रचनात्मकता को जनजागरण से जोड़ा। बच्चों ने लॉकडाउन के दौरान अपने-अपने घरों में रहकर दीवार पत्रिका का निर्माण किया और आसपास के लोगों को इसके माध्यम से covid-19 के बारे में जागरुक किया। तब से निरंतर दीवार पत्रिका के माध्यम से आम लोगों को जोड़ा जा रहा है। बच्चे दीवार पत्रिका का निर्माण करने के उपरांत अपने-अपने पड़ोस में ‘2 गज की दूरी, मास्क है जरूरी’ का संदेश देते हैं। खास बात यह है कि इस दौरान Covid-19 की गाइडलाइन का पूरा पालन किया जाता है।

सहायक अध्यापक भास्कर जोशी ने बताया कि पूरे कोरोना काल के दौरान हमने अपने क्षेत्र में दीवार पत्रिका, नुक्कड़ नाटक, वीडियो संदेश के माध्यम से कोरोना के विरुद्ध जागरूकता कार्यक्रम चलाया। यह कार्यक्रम इसलिए खास था क्योंकि यह बच्चों और अभिभावकों द्वारा ही संचालित है। बड़े लोग भले ही अपने हम उम्र लोगों की बात न सुनें लेकिन बच्चों की बात जरूर सुनते हैं। इस दौरान सभी से ‘2 गज की दूरी मास्क है जरूरी’ का निवेदन किया गया। बड़े- बुजुर्गों से ठंड में अपना विशेष ध्यान रखने को कहा गया। साथ ही लोगों को अनावश्यक इधर-उधर न घूमने को कहा गया। हर किसी को हाथों को सैनिटाइज करने और हाथ सही से धोने के तरीके के बारे में बताया गया।

दीवार पत्रिका एक शून्य निवेश नवाचार है। यह जरिया ना सिर्फ उनकी भाषा की क्षमता विकसित कर रहा है, बल्कि बच्चों में रचनात्मकता और सृजन क्षमता भी बढ़ा रहा है। इसमें बच्चे अपने आसपास की घटनाओं को अपनी भाषा में व्यक्त करते हैं, जिन्हें कुछ चार्ट या पुराने अखबारों को जोड़कर उस पर चिपका दिया जाता है और फिर किसी एक जगह डिस्प्ले किया जाता है।

कोविड-19 के दौरान दीवार पत्रिका जन-जागरुकता का अहम माध्यम बनी है। इसके जरिये अपनी बात को बिना किसी से मिलेजुले पहुंचाया जाता है। इस अभियान में अभिभावक, आम लोग और विद्यालय प्रबंधन समिति का अच्छा सहयोग मिलता है।


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