शादी से 19 दिन पहले देश पर कुर्बान हुआ उत्तराखंड का लाल: मेजर चित्रेश बिष्ट की शहादत आज भी करती है गर्व और भावुक

शादी से 19 दिन पहले देश पर कुर्बान हुआ उत्तराखंड का लाल: मेजर चित्रेश बिष्ट की शहादत आज भी करती है गर्व और भावुक

देश की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर सपूत कभी भुलाए नहीं जाते। ऐसे ही एक अमर योद्धा थे देहरादून के शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट, जिन्होंने पुलवामा हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनकी शहादत आज भी हर भारतीय की आंखें नम कर देती है और सीना गर्व से चौड़ा कर देती है।

फरवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस कायराना हमले में सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हो गए थे। पूरा देश गुस्से और दुख में डूबा था। इसके बाद भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया। घाटी में जगह-जगह आतंकियों द्वारा लगाए गए आईईडी और बमों को निष्क्रिय करने का कार्य तेज किया गया।

इसी दौरान 21 फरवरी 2019 को नौशेरा सेक्टर में एक बेहद खतरनाक मिशन के दौरान मेजर चित्रेश बिष्ट आईईडी डिफ्यूज करते समय हुए विस्फोट में शहीद हो गए। वह इंजीनियरिंग कोर में तैनात थे और बम निष्क्रिय करने में विशेषज्ञ माने जाते थे। लेकिन देश की रक्षा करते हुए यह वीर सपूत खुद उस धमाके की चपेट में आ गया।

मेजर चित्रेश बिष्ट की शहादत इसलिए भी पूरे देश को भावुक कर गई क्योंकि उनकी शादी होने में महज 19 दिन बाकी थे। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, कार्ड बंट चुके थे और परिवार बेटे के घर आने का इंतजार कर रहा था। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। जिस घर में शहनाई बजने वाली थी, वहां बेटे की अंतिम विदाई का मातम पसरा हुआ था।

देहरादून का यह लाल बचपन से ही बेहद होनहार था। पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी उसकी गहरी रुचि थी। अनुशासन, मेहनत और देशभक्ति उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। स्कूल और कॉलेज के दिनों में भी वे हमेशा आगे रहते थे। उनके करीबी बताते हैं कि चित्रेश हमेशा जरूरतमंद और गरीब बच्चों की मदद करना चाहते थे। उनका सपना था कि पहाड़ के बच्चों को बेहतर शिक्षा और खेल के अवसर मिलें, ताकि वे भी देश और समाज के लिए कुछ बड़ा कर सकें।

आज उनकी शहादत को सात साल बीत चुके हैं, लेकिन उनका परिवार अब भी बेटे की यादों को दिल में संजोए हुए है। माता-पिता का दर्द आज भी कम नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों को जीवित रखने का संकल्प लिया है। यही वजह है कि आज भी मेजर चित्रेश बिष्ट के नाम से कई सामाजिक पहलें जारी हैं।

उनके माता-पिता हर साल सरकारी स्कूलों के 11 मेधावी बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान करते हैं। इनमें 6 बेटियां और 5 बेटे शामिल होते हैं। प्रत्येक छात्र को 10-10 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। इस पहल का उद्देश्य उन बच्चों को आगे बढ़ाना है, जो आर्थिक अभाव के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

सिर्फ शिक्षा ही नहीं, खेल के क्षेत्र में भी मेजर चित्रेश बिष्ट की स्मृति को जीवित रखा गया है। जिस स्कूल में उन्होंने पढ़ाई की, वहां खेल गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को उनके नाम से स्पोर्ट्स अवॉर्ड दिए जाते हैं। यह सम्मान बच्चों को प्रेरणा देता है कि मेहनत, अनुशासन और देशप्रेम से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।

मेजर चित्रेश बिष्ट के पिता अक्सर कहते हैं कि उनका बेटा भले आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी सोच, उसके सपने और उसका जज्बा आज भी लोगों के बीच जिंदा है। उनका मानना है कि जब तक किसी शहीद को देश याद रखता है, तब तक वह वास्तव में अमर रहता है।

उत्तराखंड की वीरभूमि ने देश को अनेक रणबांकुरे दिए हैं और मेजर चित्रेश बिष्ट उन्हीं अमर सपूतों में से एक हैं। उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा यह संदेश देती रहेगी कि देशसेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। भारत मां का यह वीर बेटा हमेशा देशवासियों के दिलों में अमर रहेगा।

Hill Mail
ADMINISTRATOR
PROFILE

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this