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गुलदार के आतंक से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, वन मंत्री सुबोध उनियाल के पैतृक गांव में सड़क जाम कर किया प्रदर्शन

सुबोध उनियाल के पैतृक गांव औणी में गुलदार के बढ़ते हमलों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आ गया। क्षेत्र में एक महिला पर गुलदार के हमले के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने श्रीनगर-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग के खंडाह के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित कर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतर आए और वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई महीनों से क्षेत्र में गुलदार का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शाम होते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरने लगे हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में भय का माहौल बना हुआ है। गांवों के आसपास लगातार गुलदार की आवाजाही देखी जा रही है, लेकिन वन विभाग केवल औपचारिकता निभाने तक सीमित है।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार विभागीय अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न तो प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरे लगाए गए और न ही गश्त बढ़ाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की लापरवाही के कारण आज स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित होने लगा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, औणी क्षेत्र समेत आसपास की करीब 13 ग्राम सभाएं गुलदार के खौफ से जूझ रही हैं। खेतों में काम करने जाने वाली महिलाओं और स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को सबसे अधिक खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह और शाम के समय गुलदार अक्सर आबादी वाले इलाकों के नजदीक दिखाई दे रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

महिला पर हुए ताजा हमले ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत और गुस्सा दोनों बढ़ गए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत पिंजरे लगाने, नियमित गश्त बढ़ाने और गुलदार को पकड़ने के लिए विशेष टीम तैनात करने की मांग की। साथ ही, ग्रामीणों ने वन मंत्री से भी मामले में हस्तक्षेप कर क्षेत्रवासियों को राहत दिलाने की अपील की।

सड़क जाम के कारण कुछ समय तक यातायात भी प्रभावित रहा। सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वन विभाग की टीम को सक्रिय कर जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद किसी तरह ग्रामीण शांत हुए और मार्ग को खोला गया।

पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष ने एक बार फिर सरकार और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक क्षेत्र में लोगों की जान खतरे में बनी रहेगी।

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Hill Mail

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