परेशानी, मुश्किल, संकट, नहीं हो पाएगा, कैसे करें, असंभव…. ये शब्द वास्तव में इंसान के कदम को पीछे खींच देते हैं पर अगर हौसले बुलंद हो और इच्छाशक्ति दृढ़ हो तो सबका समाधान आसान हो जाता है। हम आपको आज उत्तराखंड के एक ऐसे गांव और वहां के बाशिंदों की कहानी बताने जा रहे हैं जिन्होंने करीब तीन दशक पुराने सपने को अपनी मेहनत से पूरा कर दिया।
जी हां, पौड़ी गढ़वाल के लैंसडौन विधानसभा के ब्लॉक जयहरीखाल में एक गांव है मठाली। यह गांव शहर से जुड़ा नहीं था जिससे लोगों को कई तरह की परेशानी होती है। आना-जाना, कारोबार, परेशानी में शहर जाना हो तो अपने आप में चुनौती हुआ करता था। करीब 3 दशक से गांववाले सपना देख रहे थे कि उनके गांव में भी सड़क आएगी। काम शुरू भी हुआ पर मंजिल तक नहीं पहुंच सका।
गांव के लोगों को 2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। सरकार की तरफ से 500 मीटर तक सड़क बना दी गई पर पिछले 2 साल से सड़क का काम बंद पड़ा था। पीडब्लूडी विभाग दुगडा से अनुरोध किया गया तो जवाब आया कि बाकी का कार्य लैंसडौन पीडब्लूडी कराएगा। आखिर में गांववालों ने तय किया कि वे खुद अपने खर्चे से अब सड़क बनवाकर ही दम लेंगे।
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पैसे इकट्ठे करने का काम शुरू किया गया। जेसीबी मशीन बुलाई गई। गांववालों ने फांवड़ा उठाया और सड़क बनाने के मिशन में जुट गए। क्या महिलाएं, क्या बुजुर्ग सभी खुशी-खुशी अपने गांव के विकास के लिए आगे आए। मात्र 7 दिन में 1.5 किलोमीटर सड़क बनवाकर गांव को शहर जाने वाले रास्ते से जोड़ दिया गया।
दीपेंद्र सिंह नेगी ने ‘हिल मेल’ से तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि आज गांववालों का सपना पूरा हो गया है। उन्होंने युवाओं और समस्त ग्रामवासियों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने तन, मन, धन से इच्छाशक्ति दिखाई और कठिन कार्य को आसान बनाकर अंजाम तक पहुंचाया।





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