गढ़वाल क्षेत्र में इन दिनों मौसम का मिजाज लगातार बिगड़ा हुआ है, जिसका सीधा असर किसानों और आम जनजीवन पर देखने को मिल रहा है। तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। खासकर नगदी फसलों और फलदार वृक्षों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
गढ़वाल के विभिन्न हिस्सों में बीते कुछ दिनों से लगातार खराब मौसम बना हुआ है। नई टिहरी के भिलंगना ब्लॉक के सुनार गांव, कोटी-फैगुल, खाल पाली और ढुंगमंदार पट्टी के कई गांवों में ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर दिया। आड़, खुबानी, अखरोट, कीवी और सेब जैसे फलदार पौधों को भारी नुकसान हुआ है, वहीं गेहूं की तैयार फसल भी ओलों की चपेट में आकर तबाह हो गई।
स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी से अपने बगीचे तैयार किए थे और इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। लेकिन अचानक आए तूफान और ओलावृष्टि ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पेड़ों पर लगे फल झड़ गए और कई पौधे भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
इसी तरह गैरसैंण में भी लगातार चौथे दिन बारिश का सिलसिला जारी रहा। यहां ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण गेहूं की खड़ी फसल, सब्जियों की नर्सरी और अन्य नगदी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई जगह फसल पक चुकी है, लेकिन लगातार बारिश के चलते कटाई का काम भी बाधित हो रहा है, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
उधर मोरी के आराकोट क्षेत्र में शनिवार शाम आए आंधी-तूफान ने और भी नुकसान पहुंचाया। तेज हवाओं के चलते कई पेड़ गिर गए, जिससे एक कार क्षतिग्रस्त हो गई और आराकोट-चिंवा मोटर मार्ग करीब दो घंटे तक बाधित रहा। राहत एवं बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर गिरे पेड़ों को हटाया और यातायात बहाल किया।
वहीं पौड़ी में भी आंधी-तूफान का असर देखने को मिला। बीजीआर कॉलेज परिसर में खड़े वाहनों पर पेड़ गिरने से नुकसान हुआ। फायर यूनिट ने मौके पर पहुंचकर पेड़ों को काटकर हटाया। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन से जर्जर पेड़ों को हटाने की मांग भी उठी है।
इस प्राकृतिक आपदा से परेशान किसानों ने सरकार और प्रशासन से शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो आर्थिक संकट और गहरा सकता है। मौजूदा हालात को देखते हुए जरूरी है कि प्रशासन तत्काल नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को सहायता प्रदान करे, ताकि वे इस संकट से उबर सकें।







