Home उत्तराखंड न्यूज़ नैनीताल उत्तराखंड से अजय भट्ट को ही आखिर केंद्र में क्यों बनाया गया मंत्री, समझिए
नैनीतालउत्तराखंड न्यूज़देश-विदेश

उत्तराखंड से अजय भट्ट को ही आखिर केंद्र में क्यों बनाया गया मंत्री, समझिए

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी टीम बड़ी कर ली है। बुधवार को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित कार्यक्रम में कुल 43 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इसमें उत्तराखंड से सांसद अजय भट्ट भी शामिल थे। आइए समझते हैं कि अजय भट्ट को क्यों मंत्री बनाया गया।

मैं अजय भट्ट…. और इस तरह से नैनीताल से लोकसभा सांसद अजय भट्ट ने केंद्र में मंत्री के तौर पर शपथ ली। शाम तक उन्हें मंत्रालय भी सौंप दिया गया और आज सुबह उन्होंने रक्षा और पर्यटन राज्य मंत्री के तौर पर अपना कार्यभार भी संभाल लिया है। वह पहली बार सांसद बने हैं। इससे पहले यूपी और उत्तराखंड विधानसभा में 3 बार विधायक रहे। उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर उनके पास संसदीय कार्य, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन जैसे विभागों की जिम्मेदारी रही है।

सार्वजनिक जीवन में उन्हें 25 साल हो गए है। राजनीति में आने से पहले वह रानीखेत में वकील थे। उन्होंने कुमायूं विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की है। अल्मोड़ा के रहने वाले अजय भट्ट 60 साल के हैं। उत्तराखंड में अगले साल चुनाव और पिछले चार महीनों में अचानक बदलते गए राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते कई नाम आगे थे जिन्हें केंद्र में मंत्री बनाए जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अजय भट्ट पर ही भरोसा क्यों जताया गया। आइए समझते हैं।

इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए हमें प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2017 में लौटना होगा। उस समय अजय भट्ट उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष और नेता विपक्ष दोनों जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके रणनीतिक कुशलता, मेहनत और सांगठनिक सामर्थ्य का ही नतीजा था कि पार्टी 70 में 57 सीटें जीतकर सरकार बनाने में कामयाब रही। हालांकि कांग्रेस से सत्ता छीनकर उत्तराखंड में कमल खिलाने वाले भट्ट के साथ किस्मत ने साथ नहीं दिया और 60 साल के ब्राह्मण नेता अपनी सीट हार गए।

हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शानदार जीत दर्ज की और पहली बार लोकसभा की सीढ़ियां चढ़े। उन्होंने नैनीताल से पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता हरीश रावत को 3,39,096 वोटों से हराया था। उस साल यह प्रदेश में किसी एमपी की जीत का सबसे बड़ा अंतर था। रावत जैसे दिग्गज नेता को हराकर लोकसभा पहुंचने के बहुत बड़े मायने थे। अजय भट्ट का कद प्रदेश से निकल राष्ट्रीय हो चला था।

नैनीताल से सांसद अजय भट्ट को बड़ी जिम्मेदारी, रक्षा और पर्यटन राज्यमंत्री का जिम्मा सौंपा गया

भट्ट की खासियत यह रही है कि वह सदन पूरी तैयारी से आते हैं। फैक्ट और फीगर उनके पास रहते हैं और बहस में टू द पॉइंट अपनी बात रखते हैं। उनके कद को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में जब भी सीएम की चर्चा चलती तो उनका नाम कतार में आगे रहता लेकिन शायद केंद्रीय नेतृत्व ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था।

परिवार की बात करें तो कम उम्र में ही उनके पिता का निधन हो गया था। छात्र जीवन में ही वह एबीवीपी में शामिल हो गए और 1980 से सक्रिय राजनीति में हैं। वरिष्ठ बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी से प्रेरित भट्ट उत्तराखंड के अलग राज्य बनने और रामजन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय रहे।

वह अविभाजित उत्तर प्रदेश में पहली बार रानीखेत से 1996 में जीते।

ऐसे में अगर उत्तराखंड के दूसरे चेहरों को देखें तो साफ है कि भट्ट को उनके परिश्रम और अनुभव का फायदा मिला है।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HillMail Magazine – September 2026

HillMail Sep 2026
पत्रिकाओं के सभी अंक देखें

Related Articles

पुलिस स्मृति दिवस पर सीएम धामी ने कीं आठ बड़ी घोषणाएं, 1600 पदों पर जल्द होगी भर्ती

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित...

उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की शिष्टाचार भेंट

उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने बुधवार, 21 अक्टूबर को...