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गोपेश्वर में व्यापारियों की दुकानों पर लगा ताला तो जिलाधिकारी ‘गो बैक’ के लगे नारे, जानें पूरा मामला

कोरोना काल में व्यापारियों का बिजनस पूरी तरह से ठप हो गया। धीरे-धीरे काम पटरी पर लौटने लगा है। इस बीच गोपेश्वर में प्रशासन की एक कार्रवाई का विरोध शुरू हो रहा है। 24 घंटे का समय देकर दुकानें और आवास खाली कराने का क्या है पूरा मामला समझिए।

चमोली जिले के गोपेश्वर में पुलिस प्रशासन और पत्रकारों व व्यापारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है। अब यह मामला राजनीतिक रंग भी लेता जारहा है। कांग्रेस पार्टी ने जिलाधिकारी को हटाने की मांग कर डाली है। आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है।

आरोप है कि जिलाधिकारी के निर्देश नगर पालिका ने 24 घंटे का टाइम देकर कुछ लोगों को आवंटित आवास व दुकानों से निकालकर उसे सील कर दिया। शुक्रवार को व्यापार संघ के अध्यक्ष समेत सात व्यापारियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया था। बाद में लोगों ने हंगामा किया तो उन्हें छोड़ दिया गया।

 

 

 

व्यापारियों का कहना है कि नगरपालिका ने 24 घंटे का समय देकर नोटिस चस्पा किया और दुकानों और कमरों को खाली कराने की कार्रवाई भी शुरू हो गई। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रही। व्यापारियों का कहना है कि पिछले दिनों जिला प्रशासन का विरोध करते हुए जिलाधिकारी का पुतला फूंका गया था। मीडिया में भी खबर उछली तो जिला प्रशासन इस तरीके से कार्यवाही कर रहा है।

जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन कहा जा रहा है कि कुछ दुकानों का लंबे समय से किराया नहीं दिया गया है। ऐसे में यह कार्यवाही करनी पड़ी।

उत्तराखंड कांग्रेस की प्रवक्ता सुजाता पॉल ने मांग की है कि चमोली जिले के जिलाधिकारी को हटाया जाए और पत्रकारों व व्यापारियों को पर्याप्त समय दिया जाएगा। 8 मिनट का वीडियो जारी कर सुजाता ने जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गोपेश्वर में डीएम के खिलाफ ‘गो बैक’ के नारे लग रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों में संवेदनशीलता होनी चाहिए लेकिन उत्तराखंड में अफसरशाही चल रही है। यहां लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

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Hill Mail

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