पांच राज्यों में चुनाव का बिगुल बज चुका है। देश की तमाम पार्टियां अपने अपने उम्मीदवारों के नामों का कर रही है। पिछले पांच साल से उत्तर प्रदेश की कमान संभाल रहे योगी आदित्यनाथ इस बार विधान सभा का चुनाव लड़ने जा रहे हैं। अब भाजपा नेतृत्व ने तय कर लिया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। नई दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में चली बैठक में इस पर सहमति बन चुकी है।
गोरखपुर से पांच बार के सांसद रहे सीएम योगी पहली बार विधानसभा चुनाव लडने जा रहे हैं। वर्ष 2017 में जब भाजपा की प्रचंड बहुमत से जीत हुई, तब वह मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं थे। पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाने के बाद विधान परिषद सदस्य के रूप में सदन भेजा। इस बार चुनाव योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर लड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री पहले ही कई बार कह चुके हैं कि वह इस बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, लेकिन सीट पार्टी तय करेगी। अब जिस तरह से मुख्यमंत्री को अयोध्या से लड़ाए जाने का निर्णय हुआ है, उससे भी भाजपा ने अपनी रणनीति का स्पष्ट संकेत दे दिया है। दरअसल, रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के साथ ही योगी सरकार अयोध्या के चहुंमुखी विकास में जुट गई। अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण सहित कई अन्य परियोजनाएं भी चल रही हैं।
विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी तय करने के लिए भाजपा प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व की बैठक दो दिन से दिल्ली में चल रही है। जिसमें केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष और प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने दावेदारों के नाम पर चर्चा की।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक शब्दों में कहा था कि यह चुनाव 80 बनाम 20 प्रतिशत का है। इसका मतलब 80 प्रतिशत हिंदू बनाम 20 प्रतिशत मुस्लिम। अब अवधपुरी से योगी के चुनाव मैदान में उतरने से राम मंदिर प्रदेशभर के लिए चुनाव के केंद्र में आ सकता है। इससे बीजेपी को कितना फायदा होगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।



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