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दिल्ली में होगा ‘योगी रामराज्य’ पुस्तक का लोकार्पण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ख्याति लखनऊ से लेकर दिल्ली और देश विदेशों में फैल रही है। उनको पिछले पांच साल के दौरान एक कुशल प्रशासन चलाने वाले मुख्यमंत्री के तौर पर देखा गया। उसी का परिणाम हुआ कि इस साल हुए विधानसभा चुनावों में उन्हें राज्य के लोगों ने फिर से भारी बहुमत से विजय दिलाई और फिर भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्य का मुख्यमंत्री बनाया।

योगी आदित्यनाथ के पांच साल के कुशल प्रशासक के तौर पर जो जो काम किये हैं उनको सामाजिक कार्यकर्ता और हिल-मेल पत्रिका की प्रबंध निदेशक और इस पुस्तक की लेखिका चेतना नेगी ने अपनी पुस्तक ‘योगी रामराज्य’ में समेटा है। जिसमें उन्होंने योगी सरकार के अहम फैसलों का जिक्र किया है। इस पुस्तक का विमोचन शनिवार को दिल्ली के कॉस्टीट्यूशन क्लब में केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह, उत्तराखंड के पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत, यूपी के गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी और राज्य के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल की मौजूदगी में किया जाएगा।

रामराज्य की परिकल्पना एक आदर्श व्यवस्था का प्रतीक है। रामराज्य ऐसे क्षेत्र की संपूर्ण परिभाषा है, जहां हर क्रियाकलाप एक दूसरे के सामंजस्य से पूरा होता है। रामराज्य की संकल्पना जनहित और सर्वसमावेशी व्यवस्था पर आधारित है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद पांच वर्ष की अवधि में महंत योगी आदित्यनाथ ने सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन किए और एक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को मूर्त रूप दिया।

योगी आदित्यनाथ ने अपने पांच वर्ष के शासन के दौरान उत्तर प्रदेश को अपने सांस्कृतिक वैभव के विराट स्वरूप के दर्शन कराए और आधुनिक राज्य की पहचान को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाया। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की आम जनमानस तक सहज सुलभता और विकास के नए कीर्तिमान उस रामराज्य की अवधारणा को प्रदर्शित करते हैं, जिसमें जनकल्याण ही सर्वोपरि है। पांच वर्ष के दौरान सत्ता की दृढ़ता, दूरदर्शिता, सजग प्रबंधन, संवेदनशीलता से परिस्थितियां ऐसे परिवर्तित हुई कि उत्तर प्रदेश उद्योगपतियों, पूंजी निवेशकों, कॉरपोरेट सेक्टर का सर्वप्रिय राज्य बन गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पांच साल के सुशासन पर आधारित पुस्तक ‘योगी रामराज्य’ की लेखिका चेतना नेगी मूल रूप से सामाजिक सरोकारों को समर्पित रही हैं। बाल्यकाल में लखनऊ में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी से कई बार भेंट। देहरादून से बारहवीं की शिक्षा प्राप्त करने के बाद गढ़वाल विश्वविद्यालय से संबंद्ध एम.के.पी. कॉलेज से 2001 में स्नातक और 2003 में अर्थशास्त्र मे स्नातकोत्तर किया। इसके बाद 2008 में सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से एम.बी.ए. की डिग्री हासिल की। पांच साल नोयडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अध्यापन कार्य भी किया।

चेतना नेगी ने सामाजिक सरोकारों को लेकर एक बड़ी पहल करते हुए 2012 में ‘हिलमेल फाउंडेशन’ की स्थापना की। वह इस फाउंडेशन की संस्थापक और संचालक हैं। इस संस्था की ओर से बड़े पैमाने पर उत्तराखंड में रिवर्स पलायन की मुहिम चलाई जा रही है। वह दिल्ली और देहरादून से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका ‘हिल-मेल’ की प्रबंध निदेशक भी हैं। वर्तमान में दिल्ली में रहने वाली चेतना नेगी के पति मनजीत नेगी न्यूज चैनल ‘आजतक’ के एडिटर हैं। परिवार में उनकी एक बेटी सारा हैं। चेतना नेगी के पिता स्व. जे.बी. सिंह सत्र न्यायाधीश रहे हैं और माता महेंद्र कुमारी झांसी से हैं।

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Hill Mail

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