आपदाग्रस्त क्षेत्रों के लिए तकनीक लाभदायक
पिछले साल उत्तराखंड त्रासदी में आपदाग्रस्त क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने में सबसे अधिक जरूरत पुलों की महसूस की गई। लेकिन, झटपट मजबूत पुलों के निर्माण की तकनीक के अभाव में सरकार असहाय नजर आई। मगर, अब आपदाग्रस्त क्षेत्रों में फंसे लोगों को झटपट बाहर निकालना आसान हो पाएगा।
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने पहली बार सिविल सेक्टर को प्री-फेब्रिकेटेड पुल की तकनीक सौंपी है। यह पुल न सिर्फ बेहद हल्का व मजबूत है, बल्कि इसका निर्माण सिर्फ दो घंटे के भीतर किया जा सकता है।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित गैर सरकारी संगठन हैस्को के हैस्को ग्राम में पहली बार सिविल क्षेत्र को समर्पित प्री-फेब्रिकेटेड पुल का लोकार्पण भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. आर. चिदंबरम ने किया। इस मौके पर बोलते हुए डॉ. चिदंबरम ने ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लोगों के रहन-सहन में सुधार के लिए एस एंड टी एजेंसियों के योगदान की भूमिका को रेखांकित किया।
रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और आर एंड डी विभाग, रक्षा मंत्रालय के सचिव डॉ. अविनाश चंदर ने अपने संदेश में कहा कि डी.आर.डी.ओ. नए आविष्कार करने वाला संगठन है जो रक्षा सेनाओं के लिए विकसित की गई तकनीकों को आम लोगों के लाभ के लिए भी इस्तेमाल योग्य बना देता है।
डी.आर.डी.ओ. द्वारा रक्षा सेनाओं के लिए बनाए गए पैदल पुल को बनाने की तकनीक का इस्तेमाल बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है।
पांच-छह लाख रूपये की लागत में बने इस पर्वतीय पैदल पुल पर आना-जाना आसान होने से प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्र में बचाव व राहत कार्यों के लिए काफी सुविधाजनक साबित होगा।
डी.आर.डी.ओ. द्वारा बनाए गए इस पर्वतीय पैदल पुल की सहायता से रक्षा सेनाओं को बहुत जल्दी पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात कर पाने में मदद मिलती है।
इस अवसर पर बोलते हुए डीएस और महानिदेशक, (शस्त्र व युद्ध प्रणाली) श्री अनिल दातार ने डी.आर.डी.ओ. के सामाजिक सरोकारों की ओर ध्यान दिलाते हुए वैज्ञानिक समुदाय से रक्षा प्रौद्योगिकी के नागरिक प्रयोगों का पता लगाते रहने को कहा। उन्होनें ऐसे प्रयोगों को खोजने में डी.आर.डी.ओ. के महत्वपूर्ण योगदान का ब्यौरा भी दिया।
आर एंड डीई (ई) के निदेशक डॉ. गुरूप्रसाद ने इस पुल के बनने की की प्रक्रिया का वर्णन किया।
हेस्को के संस्थापक डॉ. अनिल जोशी ने हिमालय के दूरदराज के इलाकों में इस तकनीक को पहुंचाने का वादा किया।
प्री-फैब्रिकेटेड पुल की विशेषताएं:-
- महज दो घंटे में पांच-छह लाख रुपये की लागत से पुल तैयार किया जा सकता है।
- इस पुल के एंगल बेहद हल्के होते हैं, एक व्यक्ति भी इन्हें आसानी से उठा सकता है।
- 13 मीटर लंबे इस पुल में एक दुपहिया वाहन, एक भैंस, 25-30 व्यक्ति एक समय में आसानी से आवाजाही कर सकते हैं।
हिलमेल ब्यूरो


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