Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ ईको-सेंसिटिव जोन का नफा नुकसान
उत्तराखंड न्यूज़

ईको-सेंसिटिव जोन का नफा नुकसान

हाल में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने एक शिष्टमंडल के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर उत्तरकाशी जनपद में ईको-सेंसिटिव जोन घोषित करने संबन्धी नोटिफिकेशन वापस लेने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि इस नोटिफिकेशन से सामरिक महत्व के सीमावर्ती जनपद उत्तरकाशी के सामाजिक-आर्थिक विकास पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। शिष्टमंडल में उत्तराखण्ड से सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत, सांसद सतपाल महाराज, प्रदीप टम्टा, उत्तराखण्ड की पर्यटन मंत्री अमृता रावत, मुख्य सचिव सुभाष कुमार सम्मिलित थे।

828_1367842070ईको-सेंसिटिव जोन घोषित किये जाने से तात्कालिक रूप से सबसे बड़ी समस्या गंगोत्री क्षेत्र में जाने वाले तीर्थ यात्रियों एवं वाहनों की संख्या पर नियंत्रण करने की है। चार धाम यात्रा हेतु देश-विदेश के यात्रियों ने कई माह पूर्व ही अपने आरक्षण करा रखे है और ऐसे में अंतिम समय में उन्हें रोकना व्यवहारिक नहीं है। चार धाम यात्रा का देश-विदेश में बड़ा महत्व है और गंगोत्री जाने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या पर किसी प्रकार का नियंत्रण लगाने से करोड़ों श्रद्वालुओं की आस्था पर चोट पंहुच सकती है। साथ ही स्थानीय ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

जुलाई 2011 में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जो ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया गया था उसके प्रावधानों में कई महत्वपूर्ण बदलाव बिना राज्य सरकार को विश्वास में लिये किये गये हैं। उक्त नोटिफिकेशन पर राज्य सरकार द्वारा जो आपत्ति व्यक्त की गई थी उस पर भी विचार नहीं किया गया है। यही नहीं, अपै्रल, 2013 में वेबसाइट पर प्रथम बार प्रकाशित अंतिम अधिसूचना को 18 दिसम्बर, 2012 से प्रभावी बताया जा रहा है। पूर्व प्रस्तावित नोटिफिकेशन में भागीरथी के दोनो किनारों पर 100 मीटर की दूरी तक अर्थात् कुल लगभग 40 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र ईको-सेंसिटिव जोन बताया गया था और अंतिम नोटिफिकेशन में आश्चर्यजनक रूप से बिना राज्य सरकार को बताये इसे 100 गुणा बढ़ाकर 4179.59 वर्ग किमी कर दिया गया।

पूर्व ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में 25 मेगावाट के ऊपर की जल विद्युत परियोजनाओं पर रोक लगाने का प्राविधान था वहीं अंतिम नोटिफिकेशन में हर प्रकार की जल विद्युत परियोजनाएं रोक दी गई हैं। इससे उत्तरकाशी में 1743 मेगावाट की विभिन्न परियोजनाएं रूक जायेंगी। इन परियोजनाओं पर काफी काम हो चुका है और लगभग 1061 करोड़ रूपये भी खर्च हो चुके है। सामरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में विकास कार्य अवरूद्व होने का भय मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि ईको-सेंसिटिव जोन घोषित किये गये क्षेत्र में गंगोत्री राष्ट्रीय पार्क, गंगोत्री विशेष विकास प्राधिकरण, भागीरथी नदी घाटी प्राधिकरण जैसी कई संस्थाएं पहले से ही स्थापित है जो क्षेत्र की पारिस्थितिकी के सरंक्षण की दिशा में काम कर रही है। ईको-सेंसिटिव जोन नोटिफिकेशन का बार्डर रोड़ आर्गनाइजेशन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पडे़गा और चीन की सीमा से लगे इस संवेदनशील क्षेत्र मे सड़को का कार्य बुरी तरह से प्रभावित होगा। यही नहीं इससे राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु आवश्यक अवस्थापना विकास भी प्रभावित होगा।

केन्द्र सरकार द्वारा किये गये नोटिफिकेशन के अनुसार राज्य सरकार को दो वर्ष के भीतर एक जोनल मास्टर प्लान बनाना होगा। क्षेत्र में किसी भी निर्माण कार्य अथवा अन्य विकास कार्यो के लिये भारत सरकार की अनुमति लेनी होगी। इससे विकास कार्यो में अनावश्यक विलंब होगा और लोगों में सरकार के प्रति असंतोष व्याप्त हो सकता है। सभी पर्यटन प्रोजेक्ट भारत सरकार द्वारा गठित मानीटरिंग कमेटी द्वारा पास किए जायेंगे यहां तक कि ट्रेकिंग और मोटर वाहन परिचालन भी नियंत्रित किया जायेगा। इससे पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित होगा। नोटिफिकेशन के प्रावधानों के परीक्षण के लिये एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाये जिसमें रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, आपदा प्रबंधन विभाग का प्रतिनिधित्व हो।

– हिलमेल ब्यूरो

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...