मुख्य अतिथि अजय भट्ट ने कहा कि भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के साथ कृषि उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। इस उपलब्धि में पंतनगर विश्वविद्यालय और कृषि वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय हरित क्रांति की आधारशिला रखने वाले प्रमुख संस्थानों में शामिल रहा है। उन्नत बीज, नई तकनीक और अनुसंधान का लाभ किसानों तक पहुंच रहा है। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन और कृषि विविधीकरण अपनाकर आय बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
किसान आयोग के उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नामधारी ने किसानों से अन्नदाता के साथ कृषि उद्यमी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन के जरिए किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने ड्रोन तकनीक, स्मार्ट फार्मिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने की जरूरत बताई। उन्होंने किसान मेले की अवधि बढ़ाने के लिए सरकार को पत्र भेजने की बात भी कही।
राजेश शुक्ला ने पंतनगर विश्वविद्यालय को उत्तराखंड की कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण धुरी बताया। उन्होंने पलायन और गांवों के निर्जन होने की चुनौती के बीच कृषि को रोजगार और आय का प्रभावी माध्यम बनाने पर जोर दिया।
कुलपति डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने कहा कि किसान मेला किसी एक व्यक्ति का आयोजन नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, किसानों और उद्यमियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि किसानों की बीज जरूरत पूरी करने के लिए विश्वविद्यालय ने तीन शिफ्टों में काम किया और पिछले वर्ष की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक बीज तैयार किया।
निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने बताया कि मेले में 675 स्टॉल लगाए गए। विश्वविद्यालय द्वारा उत्पादित बीज एवं पौध सामग्री की करीब दो करोड़ रुपये की बिक्री हुई, जबकि लगभग पौने दो लाख लोगों ने मेले में पहुंचकर सहभागिता की। प्राकृतिक एवं जैविक खेती, स्मार्ट खेती, एआई और नवाचार पर विशेष स्टॉल लगाए गए।
समापन समारोह में सर्वश्रेष्ठ प्रतिष्ठान का पुरस्कार बिहानी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, रुद्रपुर को तथा सर्वोत्तम प्रदर्शन का पुरस्कार मनराज एग्रो इंडस्ट्रीज को दिया गया। महिला क्लब पंतनगर को बेस्ट समूह चुना गया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों की पुस्तकों का विमोचन हुआ। निदेशक शोध डॉ. एसके वर्मा ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया।




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