उद्घाटन के बाद कुलपति ने राज्यपाल और कृषि मंत्री को विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों, नवाचार आधारित स्टालों तथा स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए उत्पादों के स्टालों का अवलोकन कराया। मेले में कृषि यंत्रों, जैविक उत्पादों, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, दुग्ध उत्पाद, पुष्प एवं सब्जियों की नवीन प्रजातियों, ड्रोन तकनीक, सेंसर आधारित कृषि प्रणाली और स्मार्ट कृषि उपकरणों का प्रदर्शन किया गया है।
इस अवसर पर राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह ने कहा कि 21वीं सदी की कृषि को नई दिशा देने के लिए तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को किसानों के खेत तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और अब खाद्य उत्पादन के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
राज्यपाल ने पंतनगर विश्वविद्यालय की कृषि क्षेत्र में भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि 120वें किसान मेले के पीछे 119 आयोजनों का अनुभव और समृद्ध परंपरा जुड़ी है। उन्होंने इसे वैज्ञानिकों, किसानों, युवाओं, उद्यमियों और नई तकनीक को एक मंच पर लाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने देश को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दिया है और अब ‘फूड सरप्लस’ से ‘इनकम सरप्लस’ की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने उत्तराखंड में हनी क्रांति, अरोमा क्रांति और श्रीअन्न यानी मिलेट्स क्रांति की संभावनाओं पर जोर दिया। राज्यपाल ने किसानों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और अन्य आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा तभी सफल होगी, जब वैज्ञानिकों का शोध प्रयोगशाला से निकलकर किसान के खेत तक पहुंचे।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी है, जब वैज्ञानिक तकनीक किसानों तक पहुंचे। उन्होंने वैज्ञानिकों और किसानों के बीच नियमित संवाद पर जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड में बागवानी, हाई डेंसिटी एप्पल, कीवी, ड्रैगन फ्रूट और मोटे अनाज की खेती में व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने युवाओं को कृषि और कृषि उद्यमिता से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने खेती के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन और अन्य संबद्ध गतिविधियों को जोड़कर किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि में उत्पादन लागत कम करने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।
निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेन्द्र क्वात्रा ने बताया कि मेले में 560 से अधिक स्टाल लगाए गए हैं और 40 से 50 हजार किसानों के पहुंचने की संभावना है। स्वयं सहायता समूहों ने जैम, जेली, पापड़, अचार, बेकरी उत्पाद, बड़ियां और हस्तशिल्प सामग्री भी प्रदर्शित की हैं। कार्यक्रम में कृषि साहित्य का विमोचन किया गया और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से चयनित नौ प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में निदेशक शोध डॉ. एसके वर्मा ने सभी का आभार जताया।




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