हिल मेल ब्यूरो, देहरादून
उम्र, जगह, हालात कभी किसी को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकते। शायद यही वजह है कि इंसान आविष्कार करता आ रहा है। आज हम आपको उत्तराखंड के एक ऐसे ही किशोर की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने छोटी सी उम्र में अपनी प्रतिभा को साबित कर दिखाया है। हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में रहनेवाले 13 साल के कन्हैया प्रजापति बच्चों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। जिस उम्र में बच्चे विडियो गेम में कार रेसिंग लगाने की ख्वाहिश रखते हैं, कन्हैया ने अनोखी कार ही बना डाली।
यूट्यूब का लिया सहारा
जी हां, अपने नाना के घर रह रहे इस मेधावी छात्र ने बैट्री से चलने वाली कार बनाई है। हरिद्वार ही नहीं, पूरे उत्तराखंड में उनकी तकनीक की चर्चा हो रही है। खास बात यह है कि कन्हैया ने कार बनाने में किसी की मदद या मार्गदर्शन नहीं लिया। जो किया, सब अपने हिसाब से। वह खुद बताते हैं कि कुछ दिक्कत आई थी तो उन्होंने यूट्यूब की मदद ली।
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नई चीजें बनाने का है शौक
कन्हैया कक्षा 8 में पढ़ते हैं। उनमें नई चीजें करने का शौक है। ऐसे में जब भी पढ़ाई से मौका मिलता है तो वह अपने काम में जुट जाते हैं। वह इलेक्ट्रिक रोबोट, हाइड्रोलिक जेसीबी, इलेक्ट्रिक रिमोट कंट्रोल कार तथा इलेक्ट्रिक साइकिल भी बना चुके हैं।
गजब की कार
2 महीने की लगातार मेहनत के बाद अब उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक कार बनाई है। बैट्री से चलने वाली इस कार की लंबाई 5 फीट 5 इंच और चौड़ाई 2 फीट 5 इंच व ऊंचाई 4 फीट 6 इंच है। इसमें एलईडी लाइट, इंडिकेटर, हॉर्न और शीशा भी लगाया है। दूसरी कारों की तरह यह भी चाभी से ऑन, ऑफ होती है। रिवर्स और फॉरवर्ड की सुविधा भी है। कन्हैया बताते हैं कि उन्होंने कार में 230 वॉट की चार बैट्री लगाई है, जिनकी क्षमता लगभग 920 वॉट की है। गाड़ी की बॉडी में प्लाइवुड का इस्तेमाल किया गया है।
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पॉकेट मनी से किया आविष्कार
कन्हैया ने बताया कि पॉकेट मनी के अलावा उनके नाना रोशनलाल प्रजापति और मामा दीपक प्रजापति ने उनकी काफी मदद की। जीवन में वह क्या करना चाहते हैं, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि वह एक वैज्ञानिक बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। कन्हैया की इस अनोखी कार को देखने के लिए काफी लोग आ रहे हैं।


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