गढ़वाल राइफल्स के 238 अग्निवीरों को मिला डिफेंस एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट में डिप्लोमा, लैंसडाउन में आयोजित हुआ ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह

गढ़वाल राइफल्स के 238 अग्निवीरों को मिला डिफेंस एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट में डिप्लोमा, लैंसडाउन में आयोजित हुआ ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह

उत्तराखंड के लैंसडाउन स्थित गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर (जीआरआरसी) में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर देखने को मिला, जब कुल 238 अग्निवीरों को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा ‘डिप्लोमा इन डिफेंस एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट’ से सम्मानित किया गया। औपचारिक दीक्षांत समारोह के दौरान अग्निवीरों को यह शैक्षणिक उपाधि प्रदान की गई, जो सैन्य प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा के समन्वय का एक अनूठा उदाहरण है।

यह पहल गढ़वाल राइफल्स और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है, जिसका उद्देश्य अग्निवीरों की शैक्षणिक योग्यता, व्यावसायिक दक्षता और भविष्य की रोजगार क्षमता को सुदृढ़ करना है। सेना की इस दूरदर्शी पहल को अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दीक्षांत समारोह में सेना और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। अधिकारियों ने सफलतापूर्वक डिप्लोमा पूरा करने वाले सभी अग्निवीरों को बधाई देते हुए उनके अनुशासन, समर्पण और निरंतर सीखने की भावना की सराहना की। इस अवसर को विशेष इसलिए भी माना गया क्योंकि यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम था, जिसमें सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अग्निवीरों को एक राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शैक्षणिक डिप्लोमा प्रदान किया गया।

डिफेंस एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट डिप्लोमा पाठ्यक्रम को आधुनिक सुरक्षा आवश्यकताओं और पेशेवर कौशल विकास को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। पाठ्यक्रम में रक्षा अध्ययन, सुरक्षा प्रबंधन, नेतृत्व क्षमता विकास, आपदा प्रबंधन एवं प्रतिक्रिया, प्रभावी संचार कौशल और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य अग्निवीरों को केवल सैन्य जिम्मेदारियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और व्यावसायिक भूमिकाओं के लिए भी तैयार करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित एवं शिक्षित मानव संसाधन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह डिप्लोमा अग्निवीरों को सैन्य सेवा के दौरान अपनी दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और उच्च शिक्षा के अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

भारतीय सेना लंबे समय से अपने सैनिकों के समग्र विकास पर बल देती रही है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए यह कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिससे सैनिकों को केवल युद्ध कौशल तक सीमित न रखकर उन्हें शैक्षणिक और पेशेवर रूप से भी सशक्त बनाया जा सके। सेना का मानना है कि आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए सैनिकों का बहुआयामी विकास आवश्यक है।

समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि 238 अग्निवीरों द्वारा इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करना उनके आत्म-विकास, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का प्रमाण है। सैन्य प्रशिक्षण की कठोर दिनचर्या के बीच शिक्षा प्राप्त करना आसान नहीं होता, लेकिन इन युवाओं ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण के बल पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि यह पहल अन्य सैन्य संस्थानों और प्रशिक्षण केंद्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी। भविष्य में इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रमों का विस्तार कर अधिक से अधिक सैनिकों को लाभान्वित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले सैनिकों को आधुनिक शिक्षा और व्यावसायिक कौशल से लैस करना समय की आवश्यकता है। यह पहल न केवल सैनिकों के व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को भी और अधिक प्रभावी बनाएगी।

लैंसडाउन में आयोजित यह दीक्षांत समारोह सैन्य और शैक्षणिक जगत के सफल समन्वय का प्रतीक बन गया है। डिप्लोमा प्राप्त करने वाले 238 अग्निवीर अब न केवल बेहतर प्रशिक्षित सैनिक हैं, बल्कि वे एक ऐसी शैक्षणिक उपलब्धि के साथ आगे बढ़ रहे हैं जो उनके भविष्य को नई दिशा और नए अवसर प्रदान करेगी।

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