Sunday , 20 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ उत्तराखंड में छात्र संघ चुनाव में छात्राओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, शासनादेश जारी
उत्तराखंड न्यूज़देहरादूनसरोकार

उत्तराखंड में छात्र संघ चुनाव में छात्राओं को 50 प्रतिशत आरक्षण, शासनादेश जारी

उत्तराखंड में छात्र संघ चुनावों में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसरों में होने वाले छात्र संघ चुनाव में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का शासनादेश जारी कर दिया गया है। उच्च शिक्षा सचिव की ओर से जारी शासनादेश के बाद अब इसी व्यवस्था के आधार पर चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

 

उच्च शिक्षा विभाग के प्रभारी निदेशक एएस उनियाल ने शासनादेश जारी होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव के लिए छात्राओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। शासनादेश की प्रति संबंधित प्राचार्यों को भेजी जा रही है। इससे चुनाव प्रक्रिया को लेकर बनी स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।

प्रदेश में 118 राजकीय महाविद्यालयों के अलावा श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय टिहरी, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा और कुमाऊं विश्वविद्यालय हल्द्वानी के परिसरों में छात्र संघ चुनाव होने हैं। इन चुनावों के लिए 29 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई है। चुनाव की तारीख नजदीक होने के बीच आरक्षण का शासनादेश जारी होने से छात्र संगठनों और महाविद्यालय प्रशासन के बीच चल रही चर्चा को दिशा मिली है।

दरअसल, उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने करीब एक सप्ताह पहले छात्र संघ चुनावों में छात्राओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने राजकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसरों में व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू की। चुनाव कार्यक्रम पहले ही घोषित होने के कारण इस व्यवस्था को इसी चुनाव में लागू किए जाने को लेकर छात्र संगठनों के बीच अलग-अलग मत सामने आए।

इसी बीच अशासकीय महाविद्यालयों को लेकर स्थिति अलग बनी हुई है। प्रदेश के 14 सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। इन महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव कराने का अधिकार संबंधित विश्वविद्यालय के पास है। ऐसे में इन कॉलेजों में चुनाव और आरक्षण की व्यवस्था को लेकर अंतिम निर्णय संबद्ध विश्वविद्यालय स्तर पर लिया जाना है। प्रभारी निदेशक उच्च शिक्षा के अनुसार इन कॉलेजों की चुनाव तिथि भी संबद्ध विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित की जाएगी।

उधर, कुमाऊं विश्वविद्यालय ने भी छात्र संघ चुनाव में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित करने की दिशा में निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने शासन के दिशा-निर्देशों के आधार पर प्रस्ताव को स्वीकृति दी। विश्वविद्यालय परिसरों और संबद्ध महाविद्यालयों में वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 के चुनाव 29 सितंबर को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराने की बात कही गई है।

कुमाऊं विश्वविद्यालय में तय व्यवस्था के अनुसार छात्रा उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष के पद छात्राओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि अध्यक्ष, छात्र उपाध्यक्ष, सचिव और सांस्कृतिक सचिव के पद अनारक्षित रखे गए हैं। विश्वविद्यालय ने आगामी शैक्षणिक सत्र से छात्राओं के प्रतिनिधित्व के लिए रोस्टर व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।

हालांकि आरक्षण लागू करने के समय को लेकर कुछ महाविद्यालयों में आपत्ति भी सामने आई है। हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज समेत कुछ संस्थानों के संभावित छात्र प्रत्याशियों ने अगले सत्र से व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई थी। उनका तर्क था कि चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद आरक्षण लागू करने से उम्मीदवारों की तैयारियों पर असर पड़ सकता है।

अब शासनादेश जारी होने के बाद राजकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसरों में चुनाव प्रक्रिया इसी व्यवस्था के अनुरूप आगे बढ़ेगी। 29 सितंबर को प्रस्तावित छात्र संघ चुनावों में छात्राओं के प्रतिनिधित्व को लेकर यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

इंजीनियर पिता ने खड़ा किया नौसेना का आधार, बेटे ने संभाली तीन सितारा कमान

भारतीय नौसेना की ताकत केवल समुद्र में तैरते युद्धपोतों, पनडुब्बियों और विमानवाहक...