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वेदनी कुंड में नंदा सप्तमी की जात, बांक पहुंची नंदा देवी लोकजात यात्रा

बधाण परगना की आराध्य देवी श्री राजराजेश्वरी नंदा देवी की लोकजात यात्रा धार्मिक आस्था और परंपराओं के बीच वेदनी कुंड में नंदा सप्तमी की जात संपन्न करने के बाद बांक गांव पहुंच गई। वहीं श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा में शामिल दशोली, बंड और ज्वाल्पा देवी की देव डोलियां, छंतोलियां तथा चौसिंगा खाडू अपने अगले पड़ाव पातर नचौणिया पहुंच गए हैं। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और उन्होंने देव डोलियों के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

 

वेदनी कुंड में नंदा सप्तमी की जात के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। लाटू देवता मंदिर समिति वाण के अध्यक्ष कृष्णा बिष्ट, ग्राम प्रधान नंदुली बिष्ट, पूर्व जिला पंचायत सदस्य कृष्णा बिष्ट सहित अन्य ग्रामीणों के नेतृत्व में वाण के ग्रामीण वेदनी कुंड पहुंचे। यहां विधि-विधान के साथ नंदा सप्तमी की जात कर मां नंदा देवी का आशीर्वाद लिया गया। इस दौरान पूरा क्षेत्र नंदा देवी के जयकारों से गूंज उठा।

वेदनी कुंड में नंदा सप्तमी की जात को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। हजारों की संख्या में देवी भक्तों ने वेदनी कुंड पहुंचकर विभिन्न देव डोलियों और छंतोलियों के दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और परिवारों की खुशहाली की कामना की। कठिन पहाड़ी मार्ग और मौसम की चुनौतियों के बावजूद बड़ी संख्या में लोग धार्मिक यात्रा में शामिल हुए।

इधर, श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा में शामिल दशोली, बंड और ज्वाल्पा देवी की डोलियां एवं बड़ी संख्या में यात्रा के साथ चल रही छंतोलियां और चौसिंगा खाडू वेदनी कुंड से पातर नचौणिया के लिए रवाना हुए। देव डोलियों के साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए यात्रा को आगे बढ़ाया। पातर नचौणिया में भी यात्रा के पहुंचने पर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया।

नंदा देवी लोकजात यात्रा को उत्तराखंड की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यात्रा के दौरान विभिन्न पड़ावों पर स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु देव डोलियों का स्वागत करते हैं। इस पूरी यात्रा में देवी की आराधना के साथ स्थानीय लोक संस्कृति, परंपराएं और सामुदायिक सहभागिता भी देखने को मिलती है।

बधाण क्षेत्र में नंदा देवी की लोकजात यात्रा को लेकर लोगों में विशेष श्रद्धा है। यात्रा के आगे बढ़ने के साथ विभिन्न गांवों और पड़ावों पर श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ रही है। देव डोलियों के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए दूर-दराज से भी लोग पहुंच रहे हैं। यात्रा का यह धार्मिक स्वरूप क्षेत्र की सदियों पुरानी आस्था और परंपराओं को जीवंत बनाए हुए है।

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Hill Mail

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