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देहरादून की बदलती तस्वीर: सात हज़ार महिलाएँ बनेंगी ‘लखपति दीदी’

देहरादून जिले की महिलाओं के लिए यह साल सिर्फ़ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक नए सफर की शुरुआत लेकर आया है। भारत सरकार और स्वयं सहायता समूहों के संयुक्त प्रयासों ने सात हज़ार से भी अधिक महिलाओं के लिए ऐसा लक्ष्य तय किया है, जो उनकी ज़िंदगी को अंदर तक बदलने की क्षमता रखता है—उन्हें ‘लखपति दीदी’ बनाना। पिछले वर्षों में राज्य में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। खासकर देहरादून में, जहां पिछले साल ही 12,000 से ज़्यादा महिलाओं ने एक लाख से अधिक की वार्षिक आय हासिल की। यह उपलब्धि न सिर्फ आत्मनिर्भरता का संकेत है बल्कि इस बात का प्रमाण भी कि पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाएँ अवसर मिलने पर किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं।

 

 

स्वयं सहायता समूह इन महिलाओं को प्रशिक्षण से लेकर मार्केटिंग, आधुनिक तकनीक, उत्पाद गुणवत्ता और वित्तीय प्रबंधन तक हर स्तर पर मदद प्रदान कर रहे हैं। सरकार द्वारा ई-गुब्बा एप्लिकेशन पर महिलाओं की आय का डेटा अपलोड किया गया है ताकि वास्तविक प्रगति पारदर्शी तरीके से सामने आ सके।

इस साल का लक्ष्य पिछली उपलब्धियों से भी बड़ा है। विभिन्न विभागों के सहयोग से महिलाओं को स्वरोजगार और लघु उद्योगों के लिए तैयार किया जा रहा है। कृषि, पशुधन, वन और ग्रामीण विकास विभाग ने मिलकर प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए हैं, जो 10 से 60 दिनों की अवधि में महिलाओं को कुशल बनाते हैं। इससे उनकी आय बढ़ाने की संभावनाएं कई गुना बढ़ी हैं। देहरादून ब्लॉक में 2060 महिलाएँ, डोईवाला में 1355, विकासनगर में 735, सहसपुर में 650, रायवाला में 610 और चकराता में 400 महिलाओं को इस योजना के तहत लखपति दीदी बनने का लक्ष्य दिया गया है। इसका मतलब है कि आने वाली कुछ ही महीनों में हजारों घरों में आर्थिक मजबूती की नई रोशनी फैलने जा रही है।

 

महिलाओं के इस आर्थिक सशक्तिकरण से न केवल परिवारों की स्थिति सुधरेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी बड़ा बदलाव आएगा। गांवों में रोजगार बढ़ेगा, पलायन रुकेगा और महिलाएँ स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगी। यह बदलाव सिर्फ आर्थिक नहीं सामाजिक और मानसिक भी है। जब महिलाएँ कमाती हैं, तो पूरा परिवार प्रगति करता है। और अब देहरादून की महिलाएँ सिर्फ़ कमाने नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को आर्थिक स्वतंत्रता का अर्थ समझाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं।देहरादून की ये सात हज़ार महिलाएँ सिर्फ ‘लखपति दीदी’ नहीं बनेंगी—ये बदलाव की वो चिंगारी हैं, जो पहाड़ों में एक नई विकास गाथा लिखने वाली है।

Written by
Hill Mail

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