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गांवों में झट से हल हो जाएंगे जमीन विवाद, पीएम मोदी का उत्तराखंड को भी ‘खास तोहफा’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देशभर के प्रधानों से संवाद करने से पहले स्वामित्व योजना की शुरुआत की। बताया जा रहा है कि इससे गांवों में सीमा को लेकर होने वाला विवाद मिनटों में सुलझ जाएगा जबकि अभी सालों लग जाते हैं। आइए समझते हैं कि यह योजना क्या है और इसका उत्तराखंड से खास कनेक्शन क्यों हैं।

पंचायती राज दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से देशभर के सरपंचों से बातचीत की। इस दौरान पीएम ने स्वामित्व योजना लॉन्च की। इसकी मदद से अब सभी ग्राम पंचायतों का डिजिटलाइजेशन होगा और रिकॉर्ड रखना आसान होगा। खास बात यह है कि इस योजना से संपत्ति का सत्यापन काफी आसान हो जाएगा। पीएम मोदी के इस ‘खास तोहफे’  में  उत्तराखंड भी शामिल है। दरअसल, सबसे पहले जिन 6 राज्यों में यह योजना शुरू हो रही है, उनमें उत्तराखंड भी है।

इसके तहत पंचायती राज मंत्रालय, राज्य के राजस्व विभागों, भारतीय सर्वेक्षण मंत्रालय के सहयोग से ड्रोन सहित अन्य आधुनिक तरीकों से गांवों में रहने वाले लोगों की भूमि का सीमांकन आसानी से किया जा सकेगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस योजना की तारीफ करते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पंचायती राज दिवस के  अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वामित्व योजना की शुरुआत की है। हर्ष की बात है कि यह योजना उत्तराखंड समेत 6 राज्यों से शुरू हो रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री जी का हार्दिक आभार प्रकट करता हूं।’

उत्तराखंड के सीएम ने आगे कहा कि इस योजना के तहत गांवों की जमीनों की ड्रोन मैपिंग की जाएगी और गांवों के लोगों को जमीन का मालिकाना प्रमाण पत्र दिया जाएगा जिससे जमीन विवाद खत्म हो जाएंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि शहरों की भांति गांव में भी लोग मालिकाना प्रमाण पत्र के आधार पर बैंक से लोन ले सकेंगे।

इस योजना से अब किसी भी प्रकार के स्वामित्व के रिकॉर्ड के न होने या आबादी की भूमि के कब्जे, जल निकासी या सीमा वाले झगड़ों को हल करने में आसानी होगी। भारतीय सर्वेक्षण मंत्रालय ड्रोन के जरिए आबादी क्षेत्र का डेटाबेस बनाएगा, जिससे विकास योजनाओं को बनाने में लाभ होगा। साफ है कि अब स्वामित्व योजना से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के प्रयासों को गति मिलेगी।

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