Home अतुल्य उत्तराखंड उत्तराखंड के डिजिटल ओहो रेडियो का एक साल: सबने सुना, सबने सराहा
अतुल्य उत्तराखंडपर्यटन

उत्तराखंड के डिजिटल ओहो रेडियो का एक साल: सबने सुना, सबने सराहा

नौ नवंबर 2020 को उत्तराखंड के स्थापना दिवस पर मशहूर आरजे काव्य ने उत्तराखंड को एक सौगात देने का ऐलान किया था। ये सौगात थी देवभूमि का पहला डिजिटल रेडियो स्टेशन। आरजे काव्य ने जब उत्तराखंड का अपना 24X7 रेडियो स्टेशन लाने का ऐलान किया तो खुद उन्हें भी यह उम्मीद नहीं थी कि एक साल से कम समय में ओहो रेडियो से लोग इतना अपनापन दिखाएंगे। उसे सुदूर पहाड़ों में और सात समंदर पार एक जैसा प्यार मिलेगा।

उत्तराखंड की संस्कृति, यहां का खानपान, संगीत, पहनावा, बोलचाल – ये सारी चीजें अपने आप में समृद्ध हैं, लेकिन कहीं ना कहीं आज के मॉडर्न हो रहे जमाने में वो अपनी पहचान खो रही हैं। ऐसे में पिछले एक साल में ओहो रेडियो ने इस खोती पहचान को संजोने की कोशिश की। यह कोशिश ‘सोच लोकल, अप्रोच ग्लोबल’ के विजन के साथ लोगों के सामने आई। संगीत, शिक्षा, साहित्य, स्पोर्ट्स, करियर, पलायन, समाज और उत्तराखंड की हर बात को ओहो रेडियो नए तरीके से पेश किया। ओहो रेडियो की लांचिंग के ऐलान की पहली वर्षगांठ को शानदार तरीके से सेलीब्रेट किया गया।


राज्य स्थापना दिवस के दिन ओहो उमंगोत्सव के रूप में सजाई गई इस शाम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रख्यात कवि एवं लोक गायक गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, लोकगायक पद्मश्री प्रीतम भरतवाण विशेष रूप से पहुंचे। इस मौके पर उत्तराखंड के कई कलाकारों ने अपने सुरों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। नैननाथ रावल, किशन महिपाल, कैलाश कुमार, संजय पांडे,लता तिवारी पांडे, रेशमा शाह, पूरन सिंह राठौर, टीम घुघूती जागर, मेघना चंद्रा जैसे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वालों को सम्मानित करते हुए कहा कि समाज हित में कार्य करने वाले लोग समाज को जोड़ने का भी कार्य करते हैं। उन्होंने अपनी लोक संस्कृति एवं लोक कला को बढ़ावा देने वालों के प्रयासों की भी सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, प्रीतम भरतवाण तथा नैननाथ रावल के साथ ‘बेडू पाको बारामासा’ लोकगीत भी गाया। सीएम धामी के आग्रह पर प्रीतम भरतवाण ने ‘सरूली मेरु जिया’ और नरेंद्र सिंह नगी ने ‘ठंडो रे ठंडो’ गीत पेश किया। 77 वर्षीय नैननाथ रावल ने जब मंच पर अपनी प्रस्तुति दी तो लोगों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया।

ओहो रेडियो की एक साल की यात्रा का जिक्र करते हुए सीओओ मोनिका सोलंकी ने कहा कि नौ नवंबर को हमने उत्तराखंड का पहला डिजिटल रेडियो लाने की घोषणा की थी। फरवरी, 2021 से इसका प्रसारण शुरु किया गया। लेकिन इतने कम समय में ओहो रेडियो को इसकदर पसंद किया जाएगा। इसकी हमें भी उम्मीद नहीं थी। यह उत्तराखंड की संस्कृति, लोक और परंपरा को नई पीढ़ी तक ले जाने का ईमानदार प्रयास था, जिसका अभी तक का सफर बेहद शानदार रहा है।

आरजे काव्य ने बताया कि फरवरी में लांच के बाद हम मार्च में हिल-यात्रा पर गए तो पता चला कि सुदूर इलाकों में भी ओहो रेडियो को लोग सुन रहे हैं, इसे पसंद कर रहे हैं। लोगों को हमसे काफी उम्मीदें हैं, हम उन पर खरा उतरने का प्रयास कर रहे हैं। हमारे यहां 80 प्रतिशत गाने पहाड़ी होते हैं। हम नए कलाकारों को प्रमोट कर रहे हैं। हमें इस बात से काफी प्रोत्साहन मिलता है, जब कोई महिला सोशल मीडिया पर आकर यह कहती है कि हम घास काटने जाते हैं तो ओहो रेडियो सुनते हैं। अगले साल में कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी कंटेट पर काम करने वाले हैं।

काव्य ने कहा कि इस यात्रा में हिल-मेल का बड़ा सहयोग रहा। हिल-मेल के साथ हम लगातार समसामायिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। उत्तराखंड की कई नामीगिरामी और राष्ट्रीय स्तर की शख्सियतों ने इस ज्वाइंट प्रोग्राम में शिरकत की। कोरोना काल में हिल-मेल और ओहो रेडियो के लाइव ओपीडी को काफी सराहा गया। हिल-मेल ओहो उमंगोत्सव में मीडिया पार्टनर रहा। आज हम उत्तराखंड में कई जगह रेडियो पार्टनर बन रहे हैं। टिहरी लेक फेस्टिवल, कुंभ और मरचूला फेस्टिवल में हम पार्टनर रहे। सरकारी विभाग हमारे साथ कोलेबरेशन करना चाहते हैं। फरवरी में लांचिंग के बाद से पौने दो लाख डाउनलोड हो चुके हैं। आज दुनिया भर में एक हज़ार से ज़्यादा लोकेशंस पर लोग ओहो रेडियो ऐप के माध्यम से पहाड़ी गानों का लुत्फ़ उठा रहे हैं।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HillMail Magazine – September 2026

HillMail Sep 2026
पत्रिकाओं के सभी अंक देखें

Related Articles

कैंची धाम में दर्शन के लिए लागू होगी ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था, रोजाना 25 हजार श्रद्धालुओं की सीमा का प्रस्ताव

उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़,...

मसूरी में अक्षय कुमार और राशि खन्ना की फिल्म की शूटिंग, एक झलक पाने को उमड़ी प्रशंसकों की भीड़

उत्तराखंड की पहाड़ियों की रानी मसूरी में गुरुवार को बॉलीवुड अभिनेता अक्षय...

बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या 20.13 लाख के पार, यात्रा में अभी एक माह शेष

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में इस वर्ष तीर्थयात्रियों की संख्या...