Home उत्तराखंड न्यूज़ दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत को पद्म विभूषण सम्मान, 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर किया गया ऐलान
उत्तराखंड न्यूज़देश-विदेशदेहरादूनफ़ौज

दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत को पद्म विभूषण सम्मान, 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर किया गया ऐलान

भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) रहे स्वर्गीय जनरल बिपिन रावत को पद्म विभूषण सम्मान प्रदान किया जायेगा। 8 दिसंबर, 2021 को तमिलनाडु में हुए एक हेलीकॉप्टर हादसे में देश ने एक महायोद्धा को खो दिया।

जनरल बिपिन रावत थलसेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद 31 दिसंबर, 2019 को देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) बने थे। उन्हें मीडिया ने ‘जनता का जनरल’ जैसे खिताब दिए। जनरल रावत की लोगों के बीच लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके निधन की खबर आने के बाद उत्तर से दक्षिण और पूरब से लेकर पश्चिम तक देश में एक तरह का शोक और सदमा था। अपनी साफगोई और जमीन से जुड़े रुख के चलते वह काफी लोकप्रिय सेनाप्रमुख रहे।

सीडीएस जनरल रावत तीनों सेनाओं को सुगठित करने की बड़ी योजना पर काम कर रहे थे। उनकी कोशिश सेना के तीनों अंगों को एक ऐसे सशस्त्र बल के रूप में विकसित करने की थी, जिसमें उनकी क्षमताएं, साजो-सामान और सैनिक एकीकृत हों। इसका उद्देश्य खर्च में कमी लाना, मैन पॉवर को युक्तिसंगत बनाना और यह सुनिश्चित करना कि सशस्त्र बल एकजुट इकाई के रूप में लड़ें। तीन साल के भीतर उन्हें सेनाओं का पुनर्गठन कर ‘थिएटर कमांड’ बनाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। वह जिस थिएटर कमांड प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, वो प्रोजेक्ट चीन और पाकिस्तान से आने वाले खतरों से निपटने में अहम रोल अदा करता।

सीडीएस जनरल बिपिन रावत का रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण में भी एक बड़ा योगदान था। पिछले पांच-छह साल से थलसेना, वायुसेना और नौसेना में स्वदेशी हथियारों को ही तरजीह दी जा रही थी, तो इसका एक बड़ा श्रेय जनरल रावत को जाता है। अगर विदेशी हथियार और सैन्य साजो-सामान खरीद भी रहे थे तो उसे मेक इन इंडिया के तहत देश में ही निर्माण करने की कोशिश रहती थी। यही कारण था कि थलसेना स्वदेशी अर्जुन टैंक लेने को तैयार हुई और वायुसेना ने एलसीएच अटैक हेलीकॉप्टर लेने को हामी भरी थी। जनरल बिपिन रावत रक्षा क्षेत्र में सुधारों के लिए हमेशा जाने जाते रहेंगे।

पौड़ी के सैंण गांव से आने वाले सीडीएस जनरल रावत को सेना प्रमुख रहने के दौरान पीओके और म्यांमार में सर्जिकल स्ट्राइक, कश्मीर में आतंकवाद की कमर तोड़ने की सफल रणनीति बनाने का श्रेय तो जाता ही है, डोकलाम में चीनी सेना से टकराव के बाद भारतीय सेना के बदले तेवरों ने उनकी अहमियत साबित की। सेना में महिलाओं को स्थायी तौर पर शामिल करने का फैसला उनके कार्यकाल के दौरान ही संभव हो सका। 11वीं गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में जनवरी 1978 में कमीशन लेने वाले जनरल बिपिन रावत आईएमए से पासआउट होने वाले अपने बैच के श्रेष्ठतम कैडेट थे।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HillMail Magazine – September 2026

HillMail Sep 2026
पत्रिकाओं के सभी अंक देखें

Related Articles

भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए रामशरण नौटियाल, जुबिन नौटियाल के पिता हैं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष

उत्तराखंड की राजनीति में सोमवार को एक अहम घटनाक्रम सामने आया। देहरादून...

उत्तराखंड में अगले चार महीने में 2000 पदों पर भर्ती की तैयारी, UKSSSC का परीक्षा कैलेंडर जारी

उत्तराखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण...