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पिंडर घाटी की रहने वाली कर्नल गीता राणा को मिली पूर्वी लद्दाख के अग्रिम इलाके की जिम्मेदारी

उत्तराखंड एक छोटा राज्य होने के बावजूद भी यहां से देश की सेवा में हमारे कई वीर योद्धाओं ने अपना योगदान दिया है और अब यहां की महिलायें भी किसी से पीछे नहीं हैं। हाल ही में भारतीय सेना की उत्तरी कमान में जिस महिला सैन्य अधिकारी के हाथों में नेतृत्व सौंपा गया है वह भी उत्तराखंड की रहने वाली हैं और उनका नाम कर्नल गीता राणा है।

भारतीय सेना में देवभूमि के वीरों ने राज्य को एक अलग पहचान दिलाई है। उत्तराखंड एक छोटा राज्य होने के बावजूद भी यहां से देश की सेवा में हमारे कई वीर योद्धाओं ने अपना योगदान दिया है और अब यहां की महिलायें भी किसी से पीछे नहीं हैं। हाल ही में भारतीय सेना की उत्तरी कमान में जिस महिला सैन्य अधिकारी के हाथों में नेतृत्व सौंपा गया है वह भी उत्तराखंड की रहने वाली हैं और उनका नाम कर्नल गीता राणा है। उन्हें पूर्वी लद्दाख के अग्रिम एवं दुर्गम इलाके में सेना की इलेक्ट्रानिक, मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) की फील्ड वर्कशाप यूनिट की कमान सौंपी गई है। उत्तरी कमान में इस यूनिट की कमान संभालने वह पहली महिला सैन्य अधिकारी हैं। यह फील्ड वर्कशाप चीन से सटे पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना को हमेशा युद्ध के लिए तैयार रखती है।

कर्नल गीता राणा के कंधों पर अब सेना की 14 कोर के हर आधुनिक हथियार, उपकरण, नाइट विजन डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक यंत्र को बैटल रेडी (युद्ध के लिए हरदम तैयार) रखने की जिम्मेदारी होगी। गौरतलब रहे कि उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कुछ समय पहले मथुरा में आयोजित अलंकरण समारोह में इस बात की घोषणा की थी कि उत्तरी कमान के दुर्गम इलाकों में महिला सैन्य अधिकारियों को बटालियनों की कमान सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कर्नल गीता राणा को यह जिम्मेदारी मिलने के बाद अब जम्मू कश्मीर व लद्दाख में कुछ और महिला सैन्य अधिकारियों को भी कमान मिल सकती है।

कर्नल गीता राणा 23 साल के कार्यकाल में कई अहम पदों पर काम कर चुकी हैं। इनमें 26 डिवीजनल इन्फैंट्री मुख्यालय में जनरल स्टाफ आफिसर वन, सेना के एजीआइएफ की संयुक्त निदेशक व बड़ोदरा में सेना की ईएमई स्कूल की इंस्ट्रक्टर का अहम पद शामिल हैं। कर्नल बनने से पहले गीता राणा सेना की पश्चिमी कमान की टाइगर डिवीजन में अहम पद पर रह चुकी हैं। वह 2013 में जम्मू संभाग में नियंत्रण रेखा की सुरक्षा में तैनात सेना की 16 कोर में भी रही हैं। सेना में की गई सेवाओं के लिए उन्हें जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जा चुका है।

सेना ने कुछ समय पहले महिला सैन्य अधिकारियों को कमान अधिकारी बनाने का महत्वपूर्ण फैसला लिया था। जिसके बाद कमान अधिकारियों के 108 पदों पर उनकी तैनाती की प्रक्रिया शुरू हुई थी। महिला सैन्य अधिकारियों को इंजीनियर कोर, ऑर्डिनेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल जैसे सेना के विभिन्न अंगों में यूनिट को कमान करने का मौका दिया जा रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि जल्द ही सेना में आर्टिलरी रेजीमेंट में भी महिला सैन्य कर्मियों को तैनाती शुरू हो सकती है।

उत्तराखंड की रहने वाली कर्नल गीता राणा सितंबर 1999 में सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुई थी। वह बरेली से बीएससी करने के बाद सेना की आफिसर ट्रेनिंग अकादमी की पासआउट हैं। पिंडर घाटी की रहने वाली कर्नल गीता राणा का गांव केवर तल्ला में खुशी का माहौल बना हुआ है। यहां के रहने वाले लोगों ने कर्नल गीता राणा को यह जिम्मेदारी मिलने के लिए बधाई दी और उन्होंने कहा कि उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र ही नही पूरे उत्तराखंड के लोग गौरव महसूस कर रहे हैं। कर्नल गीता राणा की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि उत्तराखंड की बेटियां किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं और समय आने पर वह इसे साबित करके भी दिखा सकती हैं।

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Hill Mail

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