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एनडीआरआई करनाल में तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेरी मेले का आयोजन, क्लोन भैंस बनी आकर्षण का केंद्र

राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल में तीन दिवसीय डेरी मेले का आयोजन किया गया है। तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेरी मेला 8 से 10 अप्रैल तक चलेगा। इस मेले में किसानों को नवीनतम तकनीक और प्राद्योगिकी की जानकारी देने के लिए विभिन्न स्टॉल और कृषि स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी भी लगाई गई है।

राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल के द्वारा आयोजित राष्ट्रीय डेरी मेले को डॉ बीएन त्रिपाठी, उप महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, डॉ मनमोहन सिंह चौहान, कुलपति, जीबी पंत कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय, डॉ धीर सिंह, निदेशक, एनडीआरआई करनाल एवं डॉक्टर यूएस गौतम, उप महानिदेशक कृषि विस्तार आईसीएआर ने मेले का उद्द्याटन किया।

इस मेले में एनडीआरआई के अलावा, पंतनगर केवीके एवं भाई कृषि उद्योग के द्वारा भी स्टॉल लगाए गए। पहले दिन ही लगभग 5,000 किसानों ने भाग लिया। मेले में एनडीआरआई द्वारा 17 किलो दूध देने वाली क्लोन भैंस को भी प्रदर्शित किया गया, जो कि किसानों के लिए बड़ा आकर्षक का केंद्र रही।

कुलपति डॉ धीर सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाने वाला राष्ट्रीय डेरी मेला किसानों एवं पशुपालकों के लिए अनेक कारणों से उपयोगी होता है। यह मेला एक मंच है, जहां डेरी विज्ञान से संबंधित सभी नूतन तकनीक को किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। इस मेला का मुख्य आकर्षण स्वरूपा नाम क्लोन भैंस है, जिसको देखकर हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों से आए हजारों किसान एवं पशुपालक आनंदित एवं आश्चर्यचकित हुए।

इस मेले में 200 से अिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिसमें 100 से अधिक स्टॉलों पर उद्योग जगत के उद्यमी, स्टार्टअप्स एवं स्वयं सहायता समूह, बैंक, डेरी विज्ञान से संबंधित अनेक संस्थानों के स्टॉल लगे हुए हैं। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 15 स्टॉल भी मेले में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन स्टॉलों में आकर किसानों को नई नई जानकारी दी जा रही हैं और वह आगे चलकर कैसे उन्नत कृषि करें इसके लिए उन्हें शिक्षित किया जा रहा है।

देशी गायों के सरंक्षण और संख्या वृद्धि के लिए पशु क्लोनिंग तकनिकी विकसित करना एक अत्यधिक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत, 16 मार्च 2023 को गिर नस्ल की एक क्लोन बछड़ी गंगा पैदा हुई। जन्म के समय इसका वजन 32 किलोग्राम था और स्वस्थ है। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान ने 2021 में उत्तराखंड लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड देहरादून के सहयोग से राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल के पूर्व निदेशक डॉ एमएस चौहान के नेतृत्व में गिर, साहीवाल और रेड-सिंधी जैसी देशी गायों की क्लोनिंग का कार्य शुरू हुआ। देशी गायों के सरंक्षण और संख्या वृद्धि के लिए पशु क्लोनिंग तकनिकी विकसित करना एक अत्यधिक चुनौतीपूर्ण कार्य है।

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