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धौली गंगा पर उभर रहा खतरा, नीती घाटी में बन रही झील ने बढ़ाई चिंता

उत्तराखंड के सीमांत चमोली जिले की नीती घाटी एक बार फिर खतरे की जद में है। धौली गंगा नदी में झील बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, और यही झील अब भविष्य की एक बड़ी आपदा का संकेत मानी जा रही है।

प्रकृति के साथ छेड़छाड़ मनुष्य को हमेशा भारी पड़ी है, अपने बेहतर भविष्य और सुविधा के लिए इंसान प्रकृति का संतुलन तो बिगाड़ रहा है, लेकिन वास्तव में वह अपने ही आने वाले कल के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। ऐसे ही उत्तराखंड के सीमांत चमोली जिले की नीती घाटी एक बार फिर खतरे की जद में है। चमोली जिले की नीती घाटी में धौली गंगा नदी में नई झील बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। धौली गंगा नदी में बन रही यह झील भविष्य की एक बड़ी आपदा का संकेत मानी जा रही है।

पिछले चार दशकों से इस क्षेत्र का अध्ययन कर रहे, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. एम.पी.एस. बिष्ट ने हाल ही में 25 से 28 अक्टूबर के बीच एक सर्वे किया। उनके अनुसार, झील की लंबाई लगभग 350 मीटर तक पहुँच चुकी है। उनका कहना हैं की झील यूँ ही नदी का आकार लेती रही तो आने वाले समय में यही निचले हिस्सो में तबाही का कारण बनेगा।

प्रो. बिष्ट का कहना है कि, “इस वर्ष अगस्त में भारी बारिश और हिमस्खलन के कारण तमंग नाले पर बना पुल बहकर धौली गंगा में गिर गया। इससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ और पानी एक जगह ठहरने लगा। धीरे-धीरे यही ठहराव अब झील का रूप ले चुका है।”

प्रो. बिष्ट के अनुसार, इस क्षेत्र का भूगर्भीय ढांचा अत्यंत नाजुक है। यहां की ढलानों पर ग्लेशियरों के अवशेष (ढेरियां) मौजूद हैं, जो थोड़ी-सी नमी या झटके से खिसक जाते हैं। यही कारण है कि यहां बार-बार भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और एवलांच जैसी घटनाएं घटती रहती हैं।

हिमालय हमें जीवन देता है जल, जंगल और जमीन के रूप में। लेकिन जब हम उसकी सीमाओं को भूल जाते हैं, तो वही प्रकृति हमें अपनी शक्ति का एहसास कराती है। नीती घाटी में बन रही यह झील जिस प्रकार नदी का आकार लेती जा रही है यह एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक संकेत है। हमें अब भी वक्त रहते संभल जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या हम प्रकृति के संदेश को सुन पाएंगे, या फिर किसी अगली त्रासदी का इंतज़ार करेंगे?

अब जरूरत है सतत निगरानी, संवेदनशील विकास और स्थानीय चेतावनी तंत्र को मज़बूत करने की, ताकि पहाड़ साँस ले सकें, और इंसान सुरक्षित रह सके।

Written by
Hill Mail

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