अल्मोड़ा में जन्मी और वर्तमान में मुंबई में रहने वाली कविता चंद ने वर्ष 2024 में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर पर्वतारोहण और एंड्योरेंस स्पोर्ट्स को पूर्णकालिक रूप से अपनाया। एक मां होने के साथ-साथ उन्होंने जिस दृढ़ता और समर्पण के साथ अपने सपनों का पीछा किया, वह लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
डेनाली पर्वत अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं और आत्मनिर्भर अभियान शैली के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर्वतारोहियों को अपना सारा सामान, भोजन, ईंधन और सुरक्षा उपकरण स्वयं ढोकर ले जाने पड़ते हैं। अभियान के दौरान कई बार खराब मौसम ने कविता और उनकी टीम की राह में बाधाएं खड़ी कीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगभग दो सप्ताह तक बर्फीले तूफानों, ग्लेशियरों और कठिन रास्तों से संघर्ष करने के बाद उन्होंने शिखर तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
कविता चंद का यह अभियान ऐसे समय में सफल हुआ है जब डेनाली पर्वत पर मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। हाल के दिनों में इस पर्वत पर कई दुर्घटनाएं भी हुई हैं, जिनमें पर्वतारोहियों की जान तक गई। ऐसे कठिन और जोखिम भरे वातावरण में डेनाली फतह करना उनकी असाधारण क्षमता, मानसिक दृढ़ता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।
डेनाली उनकी “सेवन समिट्स” यात्रा की चौथी बड़ी सफलता है। इससे पहले वह यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस, अंटार्कटिका के माउंट विन्सन और दक्षिण अमेरिका के एकोंकागुआ पर भी तिरंगा फहरा चुकी हैं। अब उनका लक्ष्य दुनिया के सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर भारत का झंडा लहराना है।
पर्वतारोहण के अलावा कविता एक उत्कृष्ट धाविका भी हैं। वह बोस्टन मैराथन के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं और दुनिया की कई प्रतिष्ठित मैराथन प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं। उनकी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
आज कविता चंद केवल एक पर्वतारोही नहीं, बल्कि महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सपनों को पूरा करने के लिए उम्र, परिस्थितियां या चुनौतियां कभी बाधा नहीं बन सकतीं। डेनाली की बर्फीली चोटियों पर फहराया गया तिरंगा न केवल उनकी व्यक्तिगत जीत है, बल्कि पूरे उत्तराखंड और भारत के लिए गर्व का क्षण है। आने वाले समय में देश को उनसे “सेवन समिट्स” अभियान की शेष चोटियों पर भी सफलता की उम्मीद है।


Leave a comment