Wednesday , 30 September 2026
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नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति को दिलाई देश-दुनिया में पहचान

लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस के अवसर पर देहरादून में आयोजित ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह’ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि नेगी उत्तराखंड की लोक संस्कृति के ऐसे पुरोधा हैं, जिन्होंने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट प्रतिष्ठा दिलाई है। मुख्यमंत्री ने नेगी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।

सोशल बलूनी स्कूल, हरिद्वार बाईपास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक ‘Mountain Melodies of Narendra Singh Negi’ का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उत्तराखंड की लोकभाषा और लोकसंस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे नई पीढ़ी नेगी के जीवन, व्यक्तित्व और दशकों लंबी संगीत यात्रा से परिचित हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों में उत्तराखंड के जनजीवन, प्रकृति, संघर्ष, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि नेगी के गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनमें पहाड़ के समाज, संस्कृति और आम लोगों की भावनाओं की झलक दिखाई देती है। उनके रचनात्मक योगदान ने लोकगीतों और लोकभाषा को नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

समारोह में अरुणाचल प्रदेश के अभिनेता, रंगकर्मी और नाटककार ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि ताई तुगुंग ने न्यीशी भाषा, अरुणाचली हिंदी, रंगकर्म, नाटकों और सिनेमा के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाई है। उनका चर्चित नाटक ‘लप्या’ और फिल्म ‘संगी माई’ उनकी रचनात्मक यात्रा के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़ और छोपाटी जैसे पारंपरिक गीत तथा ढोल, दमाऊ, हुड़का, मशक, तुर्री और भंकोरा जैसे लोक वाद्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान के आधार हैं। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के युवा आधुनिक संगीत के साथ लोकगीतों को नए कलेवर में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे लोक संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने का काम हो रहा है।

धामी ने बताया कि लोक कलाकारों को सम्मान और अवसर देने के लिए सूचीबद्धकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब तक 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सूचीबद्ध किया जा चुका है। पात्र कलाकारों को प्रतिवर्ष निःशुल्क वाद्ययंत्र और वेशभूषा उपलब्ध कराई जा रही है। लोककला और साहित्य को जीवन समर्पित करने वाले वृद्ध एवं आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों, साहित्यकारों और लेखकों की मासिक पेंशन तीन हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये की गई है, जिसका लाभ 180 कलाकारों को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत रखने के लिए छह माह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। वर्ष 2025 में ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ शुरू किया गया, जिसके तहत पांच लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाती है। ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ से अब तक 57 साहित्यकारों को सम्मानित किया जा चुका है, जबकि ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ की सम्मान राशि 5.51 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को पर्यटन के साथ साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन ग्रामों में साहित्यकारों के लिए आवास, पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और संगोष्ठी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

उन्होंने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी जैसे लोक कलाकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के मजबूत स्तंभ हैं। उनकी रचनाओं और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह नेगी सहित साहित्यकार, कलाकार, संस्कृति प्रेमी और विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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Hill Mail

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