मुख्यमंत्री गुरुवार को हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास के लिए आयोजित एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ना गांवों में विकास की नई दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास है।
सीएम धामी ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे सरकार और जनता के बीच सेतु के रूप में काम करते हैं। गांव में रहने वाले लोगों की स्थानीय समस्याओं, जरूरतों और परिस्थितियों की जानकारी सबसे बेहतर पंचायत प्रतिनिधियों को होती है। ऐसे में विकास योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ काम करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनके लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए पंचायत स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में पंचायतों को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। पंचायतों को आवश्यक संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर उन्हें स्थानीय विकास की नेतृत्वकर्ता संस्थाओं के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी इसी सोच के साथ पंचायतों को अधिक सक्षम बनाने के लिए प्रयासरत है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को शासन की योजनाओं, विकास कार्यों और स्थानीय प्रशासन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी जा रही है। इससे उन्हें अपने क्षेत्रों में बेहतर निर्णय लेने और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।
सीएम धामी ने कहा कि गांवों का विकास केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसमें जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। पंचायतें जितनी मजबूत और जवाबदेह होंगी, विकास की गति उतनी ही तेज होगी। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपने गांवों को आदर्श और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों की परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाओं को आगे बढ़ाना आवश्यक है। पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका से गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। यही मजबूत पंचायतों के माध्यम से विकसित उत्तराखंड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।




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