विरासत महोत्सव के अंतर्गत विंटेज कार रैली का शुभारंभ नींबूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र से हुआ। रैली में शामिल ऐतिहासिक वाहनों को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह नजर आया। इन वाहनों के विभिन्न मॉडल देश और विदेशों की विरासत से जुड़े रहे। पुराने वाहनों की मौजूदगी ने न केवल लोगों को आकर्षित किया, बल्कि उन्हें बीते दौर की यादें भी ताजा करने का अवसर दिया।
रैली हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र से शुरू होकर सेवन ओक्स स्कूल, ओएनजीसी चौक, किशननगर, चकराता रोड और बिंदाल होते हुए घंटाघर पहुंची। इसके बाद वाहन चकराता रोड और बिंदाल पुल से गुजरते हुए वापस विरासत महोत्सव स्थल पर पहुंचे। शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरती रैली लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही।
शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में जौनसार-बावर के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक कला और लोक संस्कृति की मनमोहक झलक प्रस्तुत की। देवेंद्र रावत के निर्देशन में 20 सदस्यीय दल ने क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को मंच पर जीवंत किया। कार्यक्रम की शुरुआत महासू वंदना से हुई, जबकि समापन नाटी नृत्य के साथ किया गया। इस दौरान दल का प्रसिद्ध पारंपरिक तांडी नृत्य भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा।
प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में कलाकारों और वाद्ययंत्रों की अहम भूमिका रही। विनोद कुमार रलसिंगा, अमित ने ढोल, विनोद ने दुमाऊं और अनुज ने कीबोर्ड पर संगत दी। वहीं, सोनू ने गिटार, प्रिंस ने ढोलक और आशीष नेगी ने पैड पर संगीत का साथ दिया। अनुप चंद, सचिन वर्मा और मोनिका आर्या ने गायन के माध्यम से प्रस्तुतियों को विशेष रंग दिया।
कार्यक्रम में ‘बहार-ए-लखनऊ’ नृत्य प्रस्तुति भी विशेष आकर्षण रही। कृष्ण मोहन की कोरियोग्राफी और निर्देशन में प्रस्तुत इस नृत्य श्रृंखला के जरिए लखनऊ की संस्कृति, अदब और नवाबी दौर की कहानियों को मंच पर उतारा गया। इसमें वाजिद अली शाह के दौर के संदर्भों को नृत्य और संगीत के माध्यम से दर्शाया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से उस समय की सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक परंपराओं की झलक पेश की।
विरासत महोत्सव के तीसरे दिन विंटेज कार रैली और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण तथा लोक परंपराओं को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। आयोजन में आधुनिक समय के बीच इतिहास, संगीत और पारंपरिक कला से जुड़ने का अवसर मिला।




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