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उत्तराखंड एक बार फिर संकट की घड़ी से गुज़र रहा है, और ऐसे समय में जब प्रदेश को एक अनुभवी, ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले नेतृत्व की आवश्यकता है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर कर्नल अजय कोठियाल पर भरोसा जताया है। जिस तरह उन्होंने केदारनाथ आपदा के बाद वहां का पुनर्निर्माण कार्य किया था और उसे एक नई पहचान दी थी, अब वही भूमिका उन्हें हर्षिल-धराली क्षेत्र के लिए सौंपी गई है।
READ MOREपौड़ी गढ़वाल के चौथान क्षेत्र में 6 अगस्त को हुई भारी बारिश और भूस्खलन की आपदा को छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं। देडा, सुंदर गांव, जैंती डांग और थान ग्राम सभाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इन गांवों में कई घर मलबे की चपेट में आ गए हैं, जिससे ग्रामीण भय और असुरक्षा की स्थिति में जीने को मजबूर हैं।
READ MOREनरेंद्र सिंह नेगी की नजर में पर्वतीय जीवन का शायद ही कोई ऐसा पक्ष हो जिस पर उन्होंने कोई गीत न लिखा हो और उसे अपना मधुर कंठ न दिया हो। उन्होंने अनेक गढ़वाली फिल्मों में भी गीत, संगीत और स्वर दिया है। उनका जन्म 12 अगस्त 1949 को पौड़ी जनपद के पौड़ी गांव में हुआ।
READ MORE‘आपदा से बचने के लिए जब लोग भाग रहे थे, वह उस दिशा में बढ़ रहे थे, जहां मौत ने दस्तक दी थी।’ यह कोई फिल्मी संवाद नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की सच्चाई है, जिसने उत्तराखंड की दो सबसे बड़ी आपदाओं 17 जून 2013 की केदारनाथ त्रासदी और 5 अगस्त 2025 की धराली, हर्षिल आपदा की जमीनी हकीकत सबसे पहले दुनिया के सामने रखी।
READ MOREगंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर लिमच्यागाड में आपदा से क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर वैली ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। बीआरओ की टीम ने युद्धस्तर पर कार्य कर तीन दिनों की अल्प अवधि में पुल बना दिया। पुल के बन जाने से गंगोत्री मार्ग पर अब डबरानी पल तक सड़क मार्ग सुचारू हो गया है और इससे आगे क्षतिग्रस्त सड़क का तेजी से पुनर्निर्माण करने की राह भी प्रशस्त हो गई है।
READ MOREमौसम की तमाम चुनौतियों तथा विषम परिस्थितियों की परवाह न करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धराली में ग्राउंड जीरो पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर, हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाते हुए, राहत कार्यों की समीक्षा की।
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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की पहचान रही रिस्पना (ऋषिअर्पणा) नदी आज अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। कभी स्वच्छ जलधारा के रूप में बहने वाली यह नदी अब प्रदूषण, अतिक्रमण और कचरे के बोझ तले कराहती नजर आ रही है। नदी के किनारों और जलधारा में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, घरेलू कचरा, निर्माण सामग्री और अन्य अपशिष्ट पदार्थों का अंधाधुंध निस्तारण किया जा रहा है, जिससे इसका प्राकृतिक स्वरूप लगातार नष्ट होता जा रहा है।
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उत्तराखंड की पर्यटन नगरी मसूरी में हनीमून मनाने पहुंचे एक नवविवाहित दंपति से जुड़ा मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली निवासी 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पी. राधा गायत्री की मसूरी के धनौल्टी रोड स्थित एक होमस्टे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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