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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में आई प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। विशेष रूप से हर्षिल और गंगोत्री क्षेत्र में फंसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन, सुरक्षा बलों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने तीव्र गति से कार्य किया है।
READ MOREउत्तरकाशी जिले के आपदा-ग्रस्त धराली गांव में केंद्र और राज्य सरकारों ने राहत एवं बचाव अभियान को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के बाद क्षेत्र में सेना, बीआरओ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन सहित सभी एजेंसियां राहत कार्यों में सक्रिय रूप से लगी हैं।
READ MOREउत्तराखंड में साहसिक पर्यटन गतिविधियों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से पर्यटन विभाग द्वारा आज एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक सचिव पर्यटन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद (UTDB), धीराज सिंह गर्ब्याल की अध्यक्षता में पर्यटन मुख्यालय, देहरादून में सम्पन्न हुई।
READ MOREहिमालय विश्व की सबसे युवा और सबसे संवेदनशील पर्वतमालाओं में से एक है। इसकी भूगर्भीय संरचना अस्थिर है, और यहां की पास्थितिकी अत्यंत नाजुक संतुलन पर टिकी है। बदलते वैश्विक मौसम, जलवायु परिवर्तन और लगातार हो रहे अनियंत्रित मानवीय हस्तक्षेप इस संतुलन को खतरनाक रूप से बिगाड़ रहे हैं।
READ MOREउत्तराखंड में एक ओर जहां स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे किए जाते हैं, वहीं ज़मीनी सच्चाई यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इलाज के लिए अस्पताल-दर-अस्पताल भटकने को मजबूर हैं। हाल ही में एक घायल महिला और एक मासूम की इलाज के अभाव में मौत की घटनाओं ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
READ MOREउत्तरकाशी के हर्षिल क्षेत्र के धराली गांव में मंगलवार को बादल फटने की भयावह घटना सामने आई है। धराली के खीर गंगा क्षेत्र में अचानक आए तेज़ पानी और मलबे के सैलाब से गांव में भारी तबाही मच गई। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों के लापता होने का अनुमान है।
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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की पहचान रही रिस्पना (ऋषिअर्पणा) नदी आज अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। कभी स्वच्छ जलधारा के रूप में बहने वाली यह नदी अब प्रदूषण, अतिक्रमण और कचरे के बोझ तले कराहती नजर आ रही है। नदी के किनारों और जलधारा में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, घरेलू कचरा, निर्माण सामग्री और अन्य अपशिष्ट पदार्थों का अंधाधुंध निस्तारण किया जा रहा है, जिससे इसका प्राकृतिक स्वरूप लगातार नष्ट होता जा रहा है।
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उत्तराखंड की पर्यटन नगरी मसूरी में हनीमून मनाने पहुंचे एक नवविवाहित दंपति से जुड़ा मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली निवासी 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पी. राधा गायत्री की मसूरी के धनौल्टी रोड स्थित एक होमस्टे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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