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उत्तराखंड के गढ़वाल अंचल की पर्वतश्रृंखलाओं, घने वनों और दुर्गम घाटियों के बीच 17वीं शताब्दी में एक ऐसी बालिका ने जन्म लिया, जिसने आने वाले समय में इतिहास की धारा ही बदल दी। यही बालिका आगे चलकर तीलू रौतेली के नाम से जानी गई, गढ़वाल की वीरांगना, साहस और आत्मसम्मान की प्रतीक।
READ MOREसनातन का मूल आग्रह आचरण पर है, पहचान पर नहीं। धर्म (कर्तव्य), अहिंसा, करुणा, संयम, ये मूल्य किसी एक समुदाय की बपौती नहीं। जब सनातन को संकीर्ण पहचान में कैद किया जाता है, तब वह अपने ही मूल से कट जाता है।
READ MOREमाधो सिंह भंडारी ने पहाड़ काटकर नहर निर्माण का संकल्प लिया—एक ऐसा कार्य जिसे उस समय लोग असंभव मानते थे। 17वीं शताब्दी में उन्होंने इस नहर का निर्माण करवाया। इस परियोजना के अंतर्गत कठोर चट्टानों को काटकर लगभग 600 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई, जो उस युग की अद्भुत इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाती है। लोककथाओं के अनुसार, देवी को प्रसन्न करने और नहर के सफल निर्माण के लिए उन्होंने अपने पुत्र की बलि दी थी।
READ MOREमाधो सिंह भंडारी ने पहाड़ काटकर नहर निर्माण का संकल्प लिया—एक ऐसा कार्य जिसे उस समय लोग असंभव मानते थे। 17वीं शताब्दी में उन्होंने इस नहर का निर्माण करवाया। इस परियोजना के अंतर्गत कठोर चट्टानों को काटकर लगभग 600 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई, जो उस युग की अद्भुत इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाती है। लोककथाओं के अनुसार, देवी को प्रसन्न करने और नहर के सफल निर्माण के लिए उन्होंने अपने पुत्र की बलि दी थी।
READ MOREऔली स्कीइंग विंटर कार्निवल एवं राष्ट्रीय शीतकालीन खेल प्रतियोगिताएं उत्तराखंड की शीतकालीन पर्यटन क्षमता, साहसिक खेलों की परंपरा और स्थानीय समुदायों की आजीविका को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।
READ MOREपंडित नैन सिंह रावत केवल एक सर्वेक्षक नहीं थे। वे देवभूमि उत्तराखंड के वैज्ञानिक योद्धा, अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा की प्रतिमूर्ति थे। आज, जब हम तकनीक के सहारे दुनिया को नापते हैं, तब उनका जीवन यह याद दिलाता है कि संकल्प, साहस और बुद्धि से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
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प्रिया सिंह चौहान ने हासिल की 45वीं रैंक, मीनल नेगी 66वीं और अनुज पंत 69वीं रैंक के साथ प्रदेश का बढ़ाया मान
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उत्तराखंड में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए आज से ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य के पर्यटन विभाग ने यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालु सुबह 7 बजे से आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।
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