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रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार तहसील अंतर्गत बड़ेथ डुंगर टोक क्षेत्र में 28 अगस्त की रात अचानक बादल फटने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई, जिससे व्यापक स्तर पर जन-धन की हानि हुई है। घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं।
READ MOREउत्तराखंड ग्रामोत्थान परियोजना और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत शुरू हुई, जिसमें रुद्रप्रयाग की तीन महिला सहकारिताएं — उन्नति स्वायत्त सहकारिता नारी, हरियाली स्वायत्त सहकारिता रतूडा, और स्वायत्त सहकारिता जवाडी-जुड़ी हुई हैं। इन सहकारिताओं से जुड़ी महिलाओं ने पारंपरिक मिठाइयां जैसे अरसे और रोटने तैयार किए, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं।
READ MOREस्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर चमोली जनपद में देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कार्यक्रमों की धूम रही। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के अंतर्गत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने माणा से लेकर बदरीनाथ धाम तक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली।
READ MOREउत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में आई हालिया आपदा ने एक बार फिर 12 साल पहले केदारनाथ में वर्ष 2013 में हुए भीषण जलप्रलय की भयावह यादें ताजा कर दी हैं।
READ MOREउत्तराखंड की पहाड़ियों में बसे गांवों की महिलाएं आज अपने पारंपरिक ज्ञान और रचनात्मकता के सहारे आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ा रही हैं। जंगलों से मिलने वाली प्राकृतिक संपदा, जो पहले उपेक्षित मानी जाती थी, आज उन्हीं हाथों में स्वरोजगार का माध्यम बन रही है। रुद्रप्रयाग जिले के ग्राम जवाड़ी की महिलाएं इसका जीवंत उदाहरण हैं।
READ MOREउत्तराखंड के एक छोटे से गांव वीरों देवल से ताल्लुक रखने वाले अतुल कुमार ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची लगन और कड़ी मेहनत के दम पर कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है। एक ओर हजारों युवा संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर अपने सपनों से दूर हो जाते हैं, वहीं अतुल ने यह दिखा दिया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
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कपिल शर्मा ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया है। पॉलीहाउस के माध्यम से संरक्षित खेती, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्म के बीज और जैविक उर्वरकों के संतुलित उपयोग से उन्होंने कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल किया।
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भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 22 अप्रैल को प्रातः 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और पूर्ण विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे।
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