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उत्तराखंड एक बार फिर संकट की घड़ी से गुज़र रहा है, और ऐसे समय में जब प्रदेश को एक अनुभवी, ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले नेतृत्व की आवश्यकता है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर कर्नल अजय कोठियाल पर भरोसा जताया है। जिस तरह उन्होंने केदारनाथ आपदा के बाद वहां का पुनर्निर्माण कार्य किया था और उसे एक नई पहचान दी थी, अब वही भूमिका उन्हें हर्षिल-धराली क्षेत्र के लिए सौंपी गई है।
READ MORE‘आपदा से बचने के लिए जब लोग भाग रहे थे, वह उस दिशा में बढ़ रहे थे, जहां मौत ने दस्तक दी थी।’ यह कोई फिल्मी संवाद नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की सच्चाई है, जिसने उत्तराखंड की दो सबसे बड़ी आपदाओं 17 जून 2013 की केदारनाथ त्रासदी और 5 अगस्त 2025 की धराली, हर्षिल आपदा की जमीनी हकीकत सबसे पहले दुनिया के सामने रखी।
READ MOREगंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर लिमच्यागाड में आपदा से क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर वैली ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। बीआरओ की टीम ने युद्धस्तर पर कार्य कर तीन दिनों की अल्प अवधि में पुल बना दिया। पुल के बन जाने से गंगोत्री मार्ग पर अब डबरानी पल तक सड़क मार्ग सुचारू हो गया है और इससे आगे क्षतिग्रस्त सड़क का तेजी से पुनर्निर्माण करने की राह भी प्रशस्त हो गई है।
READ MOREमौसम की तमाम चुनौतियों तथा विषम परिस्थितियों की परवाह न करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धराली में ग्राउंड जीरो पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर, हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाते हुए, राहत कार्यों की समीक्षा की।
READ MOREउत्तराखंड की आपदाएं अब एक पहचानी हुई पटकथा बन गई हैं: क्लाउडबर्स्ट, बाढ़, भूस्खलन, भूमि धंसना, फिर राहत कार्य और मुआवजे की घोषणाएं। पर असली मुद्दा — टिकाऊ विकास बनाम तात्कालिक विकास — जस का तस है।
READ MOREभागीरथी के किनारे, देवभूमि उत्तराखंड की गोद में बसा हर्षिल और धराली, ये सिर्फ भूगोल नहीं हैं, ये भावना हैं। ये वो स्थान हैं जहां हिमालय की शांति, गंगा की पवित्रता और मानवीय संवेदना का संगम होता है। लेकिन समय की धार और प्रकृति की मार ने इस स्वर्ग जैसे क्षेत्र को आज शोक की छाया में ढंक दिया है।
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हिमालय की गोद में बहने वाली सदानीरी नदियाँ माँ गंगा और माँ यमुना आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही हैं। उत्तरकाशी जिले में इन आस्था की नदियों में हो रहे अवैध और अवैज्ञानिक खनन ने न केवल नदियों के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि पूरे पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र को भी अस्थिर कर दिया है।
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कोटद्वार क्षेत्र में लंबे समय से दहशत फैलाने वाला गुलदार आखिरकार वन विभाग की कार्रवाई में पिंजरे में कैद हो गया। गुलदार ने महिलाओं और मवेशियों पर हमले किए थे। ट्रैंकुलाइज कर उसे रेस्क्यू सेंटर भेजा गया, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
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