जानकारी के अनुसार, आग डेंगू वार्ड के भीतर लगी। अस्पताल में मरीजों के उपचार के लिए वार्ड में स्टाफ और अन्य कर्मचारी मौजूद थे। आग लगने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में भी चिंता फैल गई। हालांकि, शुरुआती स्तर पर ही घटना पर नियंत्रण पा लिया गया, जिससे आग को ज्यादा फैलने का मौका नहीं मिला।
सबसे राहत की बात यह रही कि घटना में किसी मरीज, तीमारदार या अस्पताल कर्मचारी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सुरक्षाकर्मी की सक्रियता से संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर आग लगने की घटना गंभीर मानी जाती है, क्योंकि वार्ड में भर्ती मरीजों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दून अस्पताल में इससे पहले भी आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जनवरी 2026 में अस्पताल के ओपीडी भवन के मेन स्विच में शॉर्ट सर्किट से अफरा-तफरी मची थी। वहीं मार्च में ओपीडी भवन की पहली मंजिल पर सीलिंग के भीतर आग लगने की घटना सामने आई थी। उस दौरान भी फायर टीम ने करीब 15 मिनट में आग पर काबू पा लिया था।
जुलाई में अस्पताल के पीडिया वार्ड में एग्जॉस्ट फैन में आग लगने के बाद प्रशासन ने सभी वार्डों और भवनों में बिजली के प्रत्येक प्वाइंट, वायरिंग, स्विच, एग्जॉस्ट फैन तथा अन्य विद्युत उपकरणों की जांच कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही पूरे अस्पताल का इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराने की बात कही गई थी।
डेंगू सीजन को देखते हुए दून अस्पताल प्रशासन ने जून में विशेष डेंगू वार्ड भी तैयार किया था। अस्पताल ने मरीजों के उपचार के साथ आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने और पर्याप्त चिकित्सा संसाधन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए थे।
शनिवार की घटना ने एक बार फिर अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और विद्युत उपकरणों की नियमित जांच की जरूरत को सामने ला दिया है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार पहुंचते हैं। ऐसे में छोटी सी लापरवाही भी गंभीर रूप ले सकती है। फिलहाल आग पर समय रहते काबू पाए जाने से बड़ा नुकसान नहीं हुआ और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।


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