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पहाड़ के पानी से बदली महिलाओं की तक़दीर, ‘देवभूमि शुद्ध धारा’ बनी रोज़गार का मजबूत सहारा

टिहरी जिले के स्यांड़ी गांव की महिलाओं ने पहाड़ के शुद्ध पानी को रोजगार का साधन बना लिया है। ‘देवभूमि शुद्ध धारा’ नाम से मिनरल वाटर प्लांट शुरू कर 11 महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं। यह पहल स्थानीय रोजगार और जल संरक्षण का सशक्त उदाहरण है।

“पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी, पहाड़ के काम नहीं आती”—इस कहावत को उत्तराखंड के टिहरी जिले की महिलाओं ने अपने हौसले और सामूहिक प्रयास से गलत साबित कर दिया है। जिले के जौनपुर ब्लॉक स्थित स्यांड़ी (जाखधार) गांव की महिलाओं ने पहाड़ के प्राकृतिक जलस्रोत को अपनी आजीविका का साधन बनाते हुए ‘देवभूमि शुद्ध धारा’ नाम से मिनरल वाटर प्लांट की शुरुआत की है। देवभूमि क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) से जुड़ी महिला समूह ने गांव के प्राकृतिक स्रोत से निकलने वाले स्वच्छ पानी को फिल्टर कर उसे बोतलों में पैक करने का काम शुरू किया है। इस पहल ने न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि गांव के जलस्रोतों के संरक्षण और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में भी एक मजबूत उदाहरण पेश किया है।

सीएलएफ की अध्यक्ष सोमन खन्ना का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना और पहाड़ के शुद्ध पानी को पहचान दिलाना है। उन्होंने बताया कि इस मिनरल वाटर प्लांट की स्थापना के लिए लगभग एक लाख रुपये की आवश्यकता थी, जिसमें से 80 हजार रुपये संगठन के माध्यम से और 20 हजार रुपये क्लस्टर लेवल फेडरेशन से एक प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण के रूप में लिए गए। मिनरल वाटर का ब्रांड नाम ‘देवभूमि शुद्ध धारा’ रखा गया है, ताकि पहाड़ की स्वच्छता और प्राकृतिक पहचान को दर्शाया जा सके। महिलाओं ने बताया कि 10 रुपये में बिकने वाली एक बोतल की लागत लगभग 5 रुपये आती है, जिसमें प्लास्टिक बोतल, फिल्टरिंग, पैकेजिंग और बिजली का खर्च शामिल है। शेष राशि सीधे समूह को लाभ के रूप में प्राप्त होती है।

इस महिला समूह से 11 महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं, जो फिल्टरिंग, बोतल भरने, पैकेजिंग और आपूर्ति का काम संभाल रही हैं। तैयार पानी की आपूर्ति मसूरी, देहरादून, उत्तरकाशी और आसपास के बाजार क्षेत्रों में की जाएगी। समूह का लक्ष्य है कि भविष्य में उत्पादन और बिक्री दोनों को बढ़ाया जाए। इस परियोजना का उद्घाटन 20 दिसंबर को मुख्य विकास अधिकारी करुण अग्रवाल द्वारा किया गया। उद्घाटन के पहले ही दिन 100 बोतलों की पैकिंग की गई, जबकि समूह ने अब प्रतिदिन 500 से 600 बोतल पानी पैक करने का लक्ष्य तय किया है।

महिलाओं का कहना है कि यह पहल उन्हें स्थायी आजीविका देने के साथ-साथ आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत कर रही है। यह प्रयास साबित करता है कि यदि सही दिशा और समर्थन मिले, तो पहाड़ की महिलाएं अपने संसाधनों से ही अपने भविष्य को संवार सकती हैं।

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Hill Mail

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