Home स्पेशल गायों के लिए पंखे, जमीन पर मैट…पहाड़ में डेयरी खड़ी करने वाले जय की कहानी
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गायों के लिए पंखे, जमीन पर मैट…पहाड़ में डेयरी खड़ी करने वाले जय की कहानी

काम कोई भी हो अगर हम उसे पूरी ईमानदारी और तन्मयता से करते हैं तो सफलता मिलने की पूरी गारंटी रहती है। पहाड़ों में जानवरों को पालना, वो भी डेयरी की नियत से कोई आसान काम नहीं लेकिन उत्तरकाशी में जयप्रकाश ने 1 गाय से अपनी डेयरी की शुरुआत की और आज वह काफी खुश हैं।

गाय-भैंस पालना हो और उनके लिए रहने का इंतजाम करना हो तो ज्यादातर लोग पारंपरिक तरीके से कमरा बनवा देते हैं और वहीं पशुओं को रखते हैं। उनके लिए जमीन कैसी हो, गर्मी न लगे, खिड़की, रोशनी पर्याप्त हो… ये सब चीजें बहुत से लोग नजरअंदाज कर देते हैं। मन में एक ही बात रहती है कि ये जानवर हैं पर ऐसा नहीं है। आज हम उत्तराखंड के एक ऐसे शख्स से आपको मिलवाने जा रहे हैं, जिन्होंने मॉडर्न डेयरी खोली है। मॉडर्न का मतलब यह है कि पशुओं के रहने, खाने-पीने, जमीन, पंखे की स्पेशल व्यवस्था की गई है।

जयप्रकाश थपलियाल उत्तरकाशी जिले के ग्राम- तियां, पोस्ट- कलोगी, विकास खंड नौगांव के रहने वाले हैं। हिल-मेल से बातचीत में उन्होंने बताया कि 2008 में उन्होंने एक गाय से डेयरी का काम शुरू किया था। इस समय 8 गायें हैं। इसी डेयरी से वह हर महीने करीब 20 हजार रुपये कमा ले रहे हैं जबकि पहले वह मुश्किल से एक से दो हजार रुपये ही कमा पाते थे।

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पीडीएफए और आंचल- इन दो संस्थाओं ने उनकी काफी मदद की। इन्हीं की मदद से उन्होंने पशुपालन करना सीखा। उन्होंने कहा कि पीडीएफए देहरादून के अध्यक्ष डॉ. हरेंद्र रावत ने काफी सहयोग किया। पहाड़ में पशुपालन आसान नहीं है, इन लोगों की वजह से सब संभव हुआ। उन्होंने कहा अभी रेट 32 रुपये है लेकिन हम चाहते हैं कि फैट को न देखकर हमें भी 37-38 रुपये किया जाए। उन्होंने कहा कि देसी गायों का फैट भले कम होता हो, पर पहाड़ में खर्चे ज्यादा हैं।

 

गायों के लिए अनुकूल वातावरण नहीं था। नीचे ऊबड़-खाबड़ जमीन, ऊंचाई कम, खिड़कियां नहीं- इसे यहां बदल दिया गया है। जयप्रकाश ने बताया कि दोनों साइड में 4×6 की खिड़की रखी, 14 फीट पर छत और फर्श को ढालदार रखा जिससे गायों के नीचे मूत्र न रहे और गायें आसानी से मैट पर सो सके। उन्होंने कहा कि गौशाला में मीथेन गैस काफी खतरनाक होती है, इससे बचने के उपाय किए गए हैं। उन्होंने गौशाला में घास काटने की मशीन लगवा रखी है। पशु जहां रहते हैं उनके नीचे मैट बिछवा रखी है। गायों को गर्मी न हो इसके लिए पंखे भी लगाए हैं।

आंचल ग्रुप में 50 सदस्य है। आंचल को ही ये लोग दूध देते हैं। आज जो कुछ भी हम कर पाए हैं उसमें आंचल का विशेष योगदान है। हालांकि वह यह भी कहते हैं कि थोड़ा रेट को लेकर बात चल रही है। हम चाहते हैं कि चारा आदि की समस्या और महंगाई को देखते हुए रेट बढ़ना चाहिए।

 

जयप्रकाश कहते हैं कि वह अपनी मॉडर्न डेयरी को ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं, जिससे लोग यहां आकर पशुपालन के बारे में जानकारी हासिल कर सकें। आज लोग करनाल, देहरादून जैसे शहरों में जाते हैं अगर सब कुछ सही रहा और सहयोग मिलता रहा तो गौशाला को विशेष बनाने की कोशिश रहेगी। वह कहते हैं कि गौसेवा में असीम आनंद है, जिसे उन्होंने महसूस किया है। गौसेवा से बढ़कर कुछ नहीं है। आज विकासखंड और जिले स्तर पर लोग जयप्रकाश को जानते हैं। वह कहते हैं सब गौसेवा की देन है।

कोरोना काल में गांव लौटे या जो लोग पशुपालन करने से डरते हैं, उनके बारे में जयप्रकाश जी कहते हैं कि मेरे परिवार में एक बेटा काफी बीमार रहता है फिर भी मैंने संघर्ष से यह सब किया है तो दूसरे क्यों नहीं कर सकते। वह खुद लोगों को जानकारी देते रहते हैं। लोग कोशिश करें जो सहयोग होगा मैं करने के लिए तैयार रहूंगा। 5 लोगों ने तीन गाय के प्रोजेक्ट का हाल में लाभ भी उठाया है।

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Hill Mail

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1 Comment

  • बहुत अच्छा लगा और मुझे भी डेरी तुरंत खोलनी है जिसमें हम 15/गाइ से काम सुरु कर रहे हैं

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