आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हिमालय की दुर्गम चोटियों पर आरोहण के उद्देश्य से आयोजित यह अभियान भारतीय तटरक्षक बल के साहस, अनुशासन, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रसेवा की भावना का परिचायक है। उन्होंने कहा कि देश की सेनाओं और अर्धसैनिक बलों की वीरता एवं पराक्रम के कारण देश सुरक्षित है। जवानों में देश के लिए कुछ भी कर गुजरने की भावना उन्हें कठिन से कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की ऊर्जा देती है।
उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय तटरक्षक की टीम माउंट मुकुट ईस्ट अभियान में सफल होगी और नई ऊर्जा व सकारात्मकता के साथ वापस लौटेगी। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि का प्रयास है कि वह अपनी क्षमता के अनुसार देशसेवा से जुड़े प्रयासों में सहयोग करे। उन्होंने कहा कि भारतीय तटरक्षक माउंटेनियरिंग टीम और हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट का यह संयुक्त अभियान पर्वतारोहण की साहसिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ युवाओं को प्रकृति, अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा के प्रति प्रेरित करेगा।
हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल कर्नल रजनीश जोशी ने कहा कि हिमालय की ऊंचाइयों पर टीम का प्रत्येक कदम शक्ति, हर चुनौती के सामने साहस, हर निर्णय में विवेक और हिमालय की विराटता के प्रति विनम्रता का प्रतीक होगा। उन्होंने बताया कि अभियान का प्रमुख उद्देश्य माउंट मुकुट ईस्ट के शिखर पर भारतीय तिरंगे को गर्व के साथ फहराना है।
कर्नल जोशी ने कहा कि अभियान की शुरुआत से पहले आचार्य बालकृष्ण से आशीर्वाद प्राप्त करना टीम के लिए सौभाग्य की बात है। उनका आशीर्वाद पर्वतारोहियों के लिए आध्यात्मिक संबल और प्रेरणा का काम करेगा। इससे अभियान में शामिल सदस्यों के आत्मविश्वास और ऊर्जा को मजबूती मिलेगी।
भारतीय तटरक्षक बल की माउंटेनियरिंग टीम के वरिष्ठ अधिकारी कमांडेंट विश्वजीत ने कहा कि माउंट मुकुट ईस्ट अभियान केवल पर्वतारोहण की चुनौती नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति समर्पण और सेवा की भावना को हिमालय की ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प भी है। उन्होंने बताया कि माउंट एवरेस्ट अभियान से पहले माउंट मुकुट ईस्ट पर आरोहण का यह भारतीय तटरक्षक बल की ओर से पहला प्रयास है।
उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान टीम को प्रतिकूल मौसम, दुर्गम भू-भाग और अत्यधिक ऊंचाई जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसके बावजूद पर्वतारोही अपने प्रशिक्षण, सामूहिक प्रयास और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अभियान को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह अभियान वर्ष 2027 के एवरेस्ट अभियान की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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