उत्तराखंड में मॉनसून की दस्तक के साथ ही कुदरत का कहर शुरू हो गया है। भारतीय मौसम विभाग ने प्रदेश के 9 जिलों देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चंपावत और उधम सिंह नगर के लिए आज भी भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। अन्य जिलों में भी गरज-चमक और तीव्र वर्षा की संभावना जताई गई है।
राज्य सरकार ने एहतियातन सभी विद्यालयों में सोमवार को अवकाश घोषित कर दिया है। साथ ही चारधाम यात्रा को भी फिलहाल 24 घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया है। तीर्थयात्रियों को सुरक्षा की दृष्टि से यात्रा पड़ावों पर रोक दिया गया है।
भारी बारिश से जान-माल का नुकसान
राज्य में हो रही अतिवृष्टि से कई ज़िलों में तबाही का मंजर देखा गया है:
- उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री हाईवे पर बादल फटने की घटना में 9 श्रमिक बह गए, जिनमें से 2 की मौत हो चुकी है और 7 अभी भी लापता हैं। यमुनोत्री हाईवे का लगभग 20 मीटर हिस्सा पानी में बह गया है।
- रुद्रप्रयाग जनपद के जखोली विकासखंड में गदेरा उफान पर आने से पौंठगाड़ पुल बह गया, जिससे बांगर पट्टी के लगभग 20 गांव मुख्यालय से कट गए हैं।
- देहरादून में बारिश के कारण दो मकान ढह गए, हालांकि जनहानि की कोई सूचना नहीं है।
- चमोली में बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कमेड़ा, नंदप्रयाग व कर्णप्रयाग के बीच कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है।
- टनकपुर-तवाघाट हाईवे (कुमाऊं मंडल) पर भी भूस्खलन के कारण धारचूला से 5 किलोमीटर दूर मार्ग अवरुद्ध है।
चारधाम यात्रा रोकी गई, हज़ारों यात्री रुके
उत्तरकाशी में आपदा के बाद प्रशासन ने चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में लगभग 7000 से अधिक यात्री विभिन्न यात्रा पड़ावों में फंसे हुए हैं।
चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि मौसम सामान्य होने के बाद ही यात्रा को पुनः शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा। यात्रियों को ज्योर्तिमठ व गोविंदघाट के गुरुद्वारे में ठहराया गया है और उन्हें सुरक्षा को लेकर लगातार जागरूक किया जा रहा है।
सरकारी अलर्ट और तैयारी
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आपदा न्यूनीकरण की दृष्टि से प्रदेश के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी ज़िलाधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वे अगले दो महीने तक “अलर्ट मोड” पर रहें और मॉनसून अवधि में नियमित तौर पर ग्राउंड ज़ीरो पर स्थिति की निगरानी करें।
नदियों और नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे अलकनंदा व मंदाकिनी नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी हैं। प्रशासन द्वारा नदी किनारे और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की अपील की जा रही है।
उत्तराखंड के लिए यह मानसून सिर्फ जलवृष्टि नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदा की चेतावनी लेकर आया है। राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन विभाग और राहत एजेंसियां सतर्क हैं, परंतु नागरिकों से भी अपेक्षा है कि वे प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करें और अनावश्यक यात्रा से बचें।








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