कोरोना संकट में हजारों की तादाद में प्रवासियों को अपने घर वापस लाने के लिए त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने बस और ट्रेन की सुविधा उपलब्ध कराई है। अब आगे सरकार इनके रहने, भरण-पोषण के साथ ही रोजगार देने की दिशा में भी बढ़ रही है। सरकार की ओर से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (Mukhyamantri Swarojgar Yojana Uttarakhand) शुरू की गई है ताकि गांव लौटे लोग अपना रोजगार शुरू कर सकें। दरअसल, सरकार को उम्मीद है कि करीब 2 लाख लोग प्रदेश में लौट आएंगे। इनमें एक बड़ी आबादी स्किल्ड लोगों की है, जिन्हें आर्थिक मदद और मैनपावर मिले तो वह स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत पात्र बेरोजगारों को राष्ट्रीय बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, राज्य सहकारी बैंक आदि के माध्यम से निर्माण सेवा और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। निर्माण क्षेत्र के उद्योग के लिए अधिकतम 25 लाख तथा सेवा व व्यवसाय क्षेत्र के लिए अधिकतम लागत 10 लाख रुपये के लोन की सीमा रखी गई है। खास बात यह है कि उन्हें 15 से 25 फीसदी तक का अनुदान दिया जाएगा। यानी सरकार 1.5 लाख रुपये से 6.5 लाख रुपये तक का अनुदान देगी। लोन पास करने की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को दी गई है। सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के आदेश भी दे दिए गए हैं।
देहरादून के DM ने समझाया इस योजना का महत्व
हिल मेल के लाइव शो ‘ई-रैबार’ में 16 मई को शामिल हुए देहरादून के जिलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव ने भी बताया कि हम ऐसा मानकर नहीं चल रहे हैं कि इस संकट में कोई जरूरतमंद हमारे पास आएगा। हम कोशिश कर रहे हैं कि बैंक को लोन देना है तो हम जानकारी दें कि ये वो शख्स हैं जिसके पास स्किल है। हम इसमें मदद करेंगे। अब जरूरी यह है कि आपका स्वरोजगार हो और आप आसपास के लोगों को भी नौकरी दे सकें। हमारे पास मैनपावर गांवों में हैं, बाहर से आने वाले प्रवासी स्किल्ड हैं और हम उन्हें वित्तीय मदद पहुंचाएंगे जिससे सभी को कनेक्ट कर इकॉनमी को मजबूत किया जा सके।
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आपको बता दें कि कोरोना को फैलने से रोकने के लिए जब से लॉकडाउन शुरू हुआ, मुश्किलें धीरे-धीरे बढ़ती चली गईं। पहले पाबंदी थी लेकिन जैसे ही आवाजाही की छूट मिलना शुरू हुई, लोग तेजी से पहाड़ की ओर चल पड़े। बहुत से लोग पैदल, साइकिल, बाइक, ऑटो से ही चल दिए। कई घटनाएं भी घटीं। सरकार ने बसें और ट्रेनें शुरू की हैं जिससे लोगों को फ्री में उनके घर तक पहुंचाया जा सके।
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स्वरोजगार में कौन-कौन सी योजनाएं
इस संकट का दूसरा पहलू यह है कि युवा प्रवासियों के सामने अब रोजगार का संकट है। इसे देखते हुए सरकार ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की है। इसके तहत निर्माण, सेवा व व्यवसाय से संबंधित सभी प्रकार की परियोजनायें, जिनमें डेयरी, पॉल्ट्री, मछली पालन, व्यवसायिक कृषि तथा रिटेल शॉप आदि को शामिल करते हुए इनके लिए अर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया गया है।
कौन-कौन से लोग होंगे लोन लेने के पात्र
इसमें ऐसे स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड लोगों को शामिल किया गया है, जिन्हें आर्थिक मदद और मैनपावर मिले तो वह स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं। ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया है जो पांच साल पहले केंद्र व राज्य सरकार से स्वरोजगार योजनाओं के तहत ऋण ले चुके हैं और उन्होंने समय पर पैसा भी वापस किया है। उन्हें भी उद्योग व व्यवसाय के लिए ऋण दिया जाएगा। मुख्य सचिव की ओर से भेजे पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इसके अलावा सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग के तहत जो योजनाएं चल रही हैं, उनका लाभ भी बेरोजगारों को दिया जाए।
ऐसे में जब ई-रैबार में देहरादून, पौड़ी और रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी आए तो उन्होंने अपने-अपने जिलों में रोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से बात की। जिलाधिकारी देहरादून के साथ पूरे एक घंटे के शो को देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें…


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