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टाइगर रिजर्व में वीआईपी शादी पर उठे सवाल: नियमों के बीच संपन्न हुआ समारोह, जांच की मांग तेज

राजाजी टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित मां सुरेश्वरी देवी मंदिर में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी संपन्न होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया है। शादी से जुड़े फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, हरिद्वार रेंज के रानीपुर गेट के भीतर स्थित यह मंदिर रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में आता है, जहां प्रवेश और गतिविधियों को लेकर सख्त नियम लागू हैं। आमतौर पर यहां शाम पांच बजे के बाद प्रवेश प्रतिबंधित होता है और ऐसे किसी भी कार्यक्रम की अनुमति नहीं होती, जिससे वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। श्रद्धालुओं को केवल निर्धारित समय में पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाती है।

इसके बावजूद शनिवार से ही मंदिर परिसर में शादी की तैयारियां शुरू हो गई थीं। परिसर को सजाया गया, वीआईपी मेहमानों के लिए विशेष व्यवस्था की गई और भोजन से संबंधित इंतजाम भी किए गए। इस दौरान ऐसे सामान भी मंदिर परिसर तक पहुंचा, जिन पर प्रतिबंध बताया जाता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कड़ी निगरानी के बावजूद यह सामग्री जंगल के भीतर कैसे पहुंची।

रानीपुर गेट पर वन विभाग की टीम तैनात रहती है, जो प्रवेश करने वाले लोगों और सामान की जांच करती है। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में सामग्री अंदर ले जाई गई, जिससे विभाग की सतर्कता पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय के लिए मंदिर का प्रवेशद्वार भी बंद कर दिया गया, जिससे आम श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, पार्क वॉर्डन ने दावा किया कि गेट सभी के लिए खुला था।

रविवार को मंत्री के बेटे अनुज और सरिता विवाह बंधन में बंधे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और नवदंपत्ति को आशीर्वाद दिया। शादी के बाद भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें कई लोगों ने हिस्सा लिया।

सोशल मीडिया पर जैसे ही शादी की तस्वीरें और वीडियो सामने आए, मामला तूल पकड़ने लगा। लोगों ने सवाल उठाए कि क्या नियम केवल आम लोगों के लिए हैं और वीआईपी को विशेष छूट दी जाती है? पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के संकेत दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न केवल वन्यजीव संरक्षण के नियमों के पालन पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासनिक जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है। अब देखना होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाते हैं।

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