सीएम योगी आदित्यनाथ के अलावा यह पुस्तक भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार, पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे, इंजीनियर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह और आरएसएस के बृज प्रान्त प्रचारक हरीश रौतेला को भेंट की।

इस पुस्तक की प्रस्तावना एनएसए अजीत डोभाल ने और भूमिका चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल अनिल चौहान ने लिखी है। इस पुस्तक में बताया गया है कि जनरल बिपिन रावत का कार्यकाल बड़ी उपलब्धियों भरा रहा है। उत्तर पूर्व में म्यांमार आपरेशन से लेकर जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन आल आउट, सर्जीकल स्ट्राइक से लेकर बालाकोट एयर स्ट्राइक तक ऐसे कई सैन्य अभियान थे जिनमें उनकी अहम भूमिका रही। सेना प्रमुख के तौर पर उनके कार्यकाल के बाद उनकी कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें 1 जनवरी 2020 को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ बनाया गया। उनके सामने तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण, साझा रणनीति, थियेटर कमांड जैसे बहुत सारे काम थे जिन पर वह 24 घंटे दिन रात काम कर रहे थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और वह 8 दिसम्बर 2021 को इस दुनिया से विदा हो गये।

इस पुस्तक के विमोचन के मौके पर एनएसए अजीत डोभाल ने कहा था कि जनरल बिपिन रावत भारत की भविष्य की लड़ाइयों को स्वदेशी हथियारों के द्वारा लड़ने की दिशा में बहुत सकारात्मक और ठोस कदम उठा रहे थे। साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक, रोबोटिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में नई स्वदेशी तकनीक के विकास पर उनका विशेष ध्यान था। जनरल बिपिन रावत ने सेना के आधुनिकीकरण और कौशल बढ़ाने का व्यापक रोडमैप तैयार किया था। दूसरे देशों के अपने समकक्षों के बीच उनकी छवि बहुत सम्माननीय थी।

पुस्तक के लेखक मनजीत नेगी कहते हैं कि देश के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत विराट व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने कहा कि रक्षा संवाददाता के तौर पर अपने लगभग 20 साल के कार्यकाल में मैंने तीनों सेनाओं के सभी प्रमुखों को एक रिर्पोटर के तौर पर कवर किया। लेकिन जनरल बिपिन रावत का जो चमत्कारिक और विराट व्यक्तित्व मैंने देखा उसको शब्दों में और किसी पुस्तक में लिख पाना संभव नहीं है। जनरल रावत ने अपने लंबे सैन्य जीवन में एक जांबाज सैनिक और अचूक रणनीतिकार की भूमिका निभाई।


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