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7 फरवरी को रैणी गांव के ऊपरी इलाके में ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा और धौलीगंगा में उफान आ गया था। इससे ऋषिगंगा और विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना को नुकसान पहुंचा। यहां काम कर रहे लोग मलबे में दफन हो गए। कुछ स्थानीय लोग बाढ़ में बह गए थे। लापता लोगों का आंकड़ा 204 बताया गया है। वहीं, तपोवन टनल में 12 व्यक्तियों को बचा लिया गया था।
READ MOREकेदारनाथ आपदा को भले ही 7 साल बीत गए हों पर प्रदेश के लोगों के जेहन में वे खौफनाक तस्वीरें अब भी ताजा हैं। ऐसे हजारों लोग भी उस दिन को याद कर सिहर उठते हैं, जिन्होंने अपनों को उस आपदा में खो दिया था या जिनके अपनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
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7 फरवरी को रैणी गांव के ऊपरी इलाके में ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा और धौलीगंगा में उफान आ गया था। इससे ऋषिगंगा और विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना को नुकसान पहुंचा। यहां काम कर रहे लोग मलबे में दफन हो गए। कुछ स्थानीय लोग बाढ़ में बह गए थे। लापता लोगों का आंकड़ा 204 बताया गया है। वहीं, तपोवन टनल में 12 व्यक्तियों को बचा लिया गया था।
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केदारनाथ आपदा को भले ही 7 साल बीत गए हों पर प्रदेश के लोगों के जेहन में वे खौफनाक तस्वीरें अब भी ताजा हैं। ऐसे हजारों लोग भी उस दिन को याद कर सिहर उठते हैं, जिन्होंने अपनों को उस आपदा में खो दिया था या जिनके अपनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
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