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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बाबा केदार के प्रति विशेष आस्था और श्रद्धा है। उनका उत्तराखंड को दुनिया की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर विकसित करने का विजन है। आधुनिक इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। पहले चरण के काम हो चुके हैं। दूसरे चरण के काम शुरू हो रहे हैं।
READ MOREनागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 इसे स्पष्ट करता है। इस अधिनियम की धारा 3 में साफ कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति को मंदिर में पूजा स्थान में जाने से रोका जाता है तो ऐसा करने वालों को एक से 6 महीने तक की सजा हो सकती है। वहीं जनप्रतिनिधि कानून 1951 के अनुसार यदि कोई नागरिक अधिकार संरक्षण कानून 1955 में दोषी पाया जाता है, तो वह 6 वर्ष चुनाव नहीं लड़ सकेगा।
READ MOREसोमवार को ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक और कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत भी केदारनाथ धाम पहुंचे थे। उन्हें भी देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहितों का विरोध झेलना पड़ा, हालांकि उन्होंने धाम में दर्शन किए। उधर, राज्य सरकार के आश्वासन के बाद भी देवस्थानम बोर्ड और एक्ट वापस नहीं होने पर तीर्थ पुरोहितों ने सोमवार को गंगोत्री बंद रखा।
READ MOREकर्नल अजय कोठियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने पंडा समाज के लोगों के साथ छलावा किया है। मुख्यमंत्री के आश्वासन पर पंडा पुरोहितों ने आंदोलन समाप्त कर दिया था। सरकार ने देवस्थानम बोर्ड के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की, जिसमें कुछ पुरोहितों को शामिल किए जाने का वादा किया गया था। लेकिन यह सिर्फ एक झूठा आश्वासन निकला।
READ MOREगंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं चारधाम महापंचायत समिति के संयोजक सुरेश सेमवाल ने कहा कि बड़ा सौभाग्य है कि ऊर्जावान मुख्यमंत्री ने तीर्थपुरोहितों को आमंत्रित किया था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट यह बात कही कि जो हाई पॉवर कमेटी बनाई गई है, उसमें आपकी ओर से आठ लोगों को मेंबर बनाया जाएगा।
READ MOREसीएम धामी ने कहा कि बदरीनाथ मास्टर प्लान को मूर्त रूप देने से पूर्व सभी संबंधित पक्षों की भी बात सुनी जाएगी और उनकी शंकाओं का निवारण किया जाएगा। सभी के हित यथासंभव सुरक्षित रहेंगे। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भी वार्ता के माध्यम से रास्ता निकाले जाने पर सहमति व्यक्त की।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बाबा केदार के प्रति विशेष आस्था और श्रद्धा है। उनका उत्तराखंड को दुनिया की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर विकसित करने का विजन है। आधुनिक इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। पहले चरण के काम हो चुके हैं। दूसरे चरण के काम शुरू हो रहे हैं।
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नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 इसे स्पष्ट करता है। इस अधिनियम की धारा 3 में साफ कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति को मंदिर में पूजा स्थान में जाने से रोका जाता है तो ऐसा करने वालों को एक से 6 महीने तक की सजा हो सकती है। वहीं जनप्रतिनिधि कानून 1951 के अनुसार यदि कोई नागरिक अधिकार संरक्षण कानून 1955 में दोषी पाया जाता है, तो वह 6 वर्ष चुनाव नहीं लड़ सकेगा।
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