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इस ग्रोथ सेंटर में काम करने वाली महिलाओं ने बताया कि इसके चलते वे घर से बाहर निकलकर नया काम सीख रही हैं। कहा जाता था कि लाइट्स बनाने का काम पुरुषों का होता है लेकिन जब हमने इसे बनाने की ट्रेनिंग ली तो यह पता चला कि यह काम कोई भी कर सकता है। हम बिजली के काम करने से डरते थे लेकिन अब हम इस काम को बड़े आसानी से कर रहे हैं। हम यहां चार से पांच घंटे काम करते हैं।
READ MOREउत्तराखंड में रूरल ग्रोथ सेंटर पर तेजी से काम हो रहा है। योजनाओं पर काम होने के बाद सरकार उसकी समीक्षा भी कर रही है कि उसका कितना फायदा जमीन पर लोगों को हुआ है। आपको बता दें कि सरकार की कोशिश है कि किसान को अपने घर के पास ही उत्पाद बेचने की सुविधा मिले।
READ MOREपर्वतीय क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग करके गांव में ही प्रोसेसिंग करवाना और इन उत्पादों की ब्रांडिंग करके उचित बाजार उपलब्ध करवाने की संकल्पना का नाम ग्रोथ सेंटर है। स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार उपलब्ध करान इसका मुख्य उद्देश्य है। यानी क्षेत्र में जिस उत्पाद की उपलब्धता है, उसे कुटीर उद्योग के तौर पर विकसित करके उत्पादन शुरू किया जाता है।
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इस ग्रोथ सेंटर में काम करने वाली महिलाओं ने बताया कि इसके चलते वे घर से बाहर निकलकर नया काम सीख रही हैं। कहा जाता था कि लाइट्स बनाने का काम पुरुषों का होता है लेकिन जब हमने इसे बनाने की ट्रेनिंग ली तो यह पता चला कि यह काम कोई भी कर सकता है। हम बिजली के काम करने से डरते थे लेकिन अब हम इस काम को बड़े आसानी से कर रहे हैं। हम यहां चार से पांच घंटे काम करते हैं।
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उत्तराखंड में रूरल ग्रोथ सेंटर पर तेजी से काम हो रहा है। योजनाओं पर काम होने के बाद सरकार उसकी समीक्षा भी कर रही है कि उसका कितना फायदा जमीन पर लोगों को हुआ है। आपको बता दें कि सरकार की कोशिश है कि किसान को अपने घर के पास ही उत्पाद बेचने की सुविधा मिले।
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