[fvplayer id=”10″]
ऋषिकेश की महापौर अनिता ममगाईं ने कहा कि पर्यावरण को समर्पित हरेला पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। यह त्यौहार संपन्नता, हरियाली, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। श्रावण मास में हरेला पूजने के उपरांत पौधे लगाए जाने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि हरेला पर्व हमें पर्यावरण से जोड़ता है। पर्यावरण का संरक्षण उत्तराखंड की संस्कृति में रहा है।
READ MOREमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हरेला सुख-समृद्धि व जागरुकता का भी प्रतीक है। पर्यावरण बचाने की संस्कृति की ऐसी सुंदर झलक देवभूमि उत्तराखंड में ही दिखती है। आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा व वातावरण मिल सके इसके लिए सबको वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण की ओर ध्यान देना होगा।
READ MOREसीएम धामी बोले, प्रकृति के संरक्षण के लिए हरेला पर्व पर सभी को वृक्षारोपण का संकल्प लेना होगा। जुलाई एवं अगस्त माह का समय वृक्षारोपण के लिए सबसे उपयुक्त है। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, पर्यावरण संरक्षण को लेकर इस साल हरेला में प्रदेश भर में 1 लाख पीपल एवं बरगद के वृक्षों को रोपने का लक्ष्य।
READ MOREमुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही पौधे कम लगाए जाएं परंतु जितने भी लगाए जाएं उनको जीवित रखने का हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इससे जुड़ना होगा।
READ MOREप्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हरेला पर्व हमारी लोक संस्कृति, प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ जुड़ाव का भी प्रतीक है। प्रकृति को महत्व देने की हमारी परंपरा रही है। प्रकृति के विभिन्न रूपों की हम पूजा करते हैं। हमारी इन परंपराओं का वैज्ञानिक आधार भी है।
READ MORE


[fvplayer id=”10″]

ऋषिकेश की महापौर अनिता ममगाईं ने कहा कि पर्यावरण को समर्पित हरेला पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। यह त्यौहार संपन्नता, हरियाली, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। श्रावण मास में हरेला पूजने के उपरांत पौधे लगाए जाने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि हरेला पर्व हमें पर्यावरण से जोड़ता है। पर्यावरण का संरक्षण उत्तराखंड की संस्कृति में रहा है।
READ MORE
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हरेला सुख-समृद्धि व जागरुकता का भी प्रतीक है। पर्यावरण बचाने की संस्कृति की ऐसी सुंदर झलक देवभूमि उत्तराखंड में ही दिखती है। आने वाली पीढ़ी को शुद्ध हवा व वातावरण मिल सके इसके लिए सबको वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण की ओर ध्यान देना होगा।
READ MORE