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स्वामी वीरेंद्रानंद उत्तराखंड में एक जाना पहचाना नाम है। कोरोना की पहली लहर में वह खुद गांव-गांव जाकर लोगों की मदद करते रहे। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए उन्होंने अपने सत्कर्मा मिशन के सदस्यों की एक टीम बनाई और गांव-गांव राहत पहुंचाने में जुट गए। यह सिलसिला कोरोना की दूसरी लहर में लगातार जारी है।
READ MOREकोरोना काल में स्वामी वीरेंद्रानंद जी महाराज की मदद से हजारों लोगों को राशन-पानी उपलब्ध हो सका। सुदूर इलाकों में जहां तक पहुंचना आसान नहीं था, स्वामी जी की संस्था के माध्यम से लोगों को राहत पहुंचाई गई। कोरोना ही नहीं, आपदा के समय भी वह जमीन पर उतरकर लोगों के घावों पर मरहम लगाने के लिए पहुंचे।
READ MOREस्वामी वीरेंद्रानंद एशियन सत्कर्मा मिशन के माध्यम से समाज सेवा के नए मापदंड स्थापित किए हैं। धारचूला क्षेत्र में ऐसा कोई गांव नहीं है, जहां उनके मिशन के परोपकार की छाया नहीं पहुंची हो।
READ MOREउत्तराखंड समेत पूरे देश में 14 सितंबर को हिंदी दिवस विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने मातृभाषा को आगे बढ़ाने और अंग्रेजी के साथ-साथ इसे भी पढ़ने-लिखने पर जोर दिया। एशियन स्कूल व एशियन सत्कर्मा मिशन की ओर से भी हिंदी दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
READ MOREउत्तराखंड में कोरोना काल में सरकार के साथ-साथ कई सामाजिक संस्थाएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। इस दौरान पिथारौगढ़ एवं अन्य जिलों में जब आपदा आई तो निस्वार्थ भाव से दिन-रात मदद में जुटे हैं सत्कर्मा मिशन के सदस्य।
READ MOREकहते हैं न कि अपने लिए जिये तो क्या जिए। दूसरों की मदद कर उसके चेहरे पर मुस्कान लाने से बड़ा कोई पुण्य कार्य क्या हो सकता है। पिथौरागढ़ में पिछले दिनों एक के बाद एक भारी बारिश, भूस्खलन में घर जमींदोज हो गए और कई लोगों की जान चली गई।
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स्वामी वीरेंद्रानंद उत्तराखंड में एक जाना पहचाना नाम है। कोरोना की पहली लहर में वह खुद गांव-गांव जाकर लोगों की मदद करते रहे। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए उन्होंने अपने सत्कर्मा मिशन के सदस्यों की एक टीम बनाई और गांव-गांव राहत पहुंचाने में जुट गए। यह सिलसिला कोरोना की दूसरी लहर में लगातार जारी है।
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कोरोना काल में स्वामी वीरेंद्रानंद जी महाराज की मदद से हजारों लोगों को राशन-पानी उपलब्ध हो सका। सुदूर इलाकों में जहां तक पहुंचना आसान नहीं था, स्वामी जी की संस्था के माध्यम से लोगों को राहत पहुंचाई गई। कोरोना ही नहीं, आपदा के समय भी वह जमीन पर उतरकर लोगों के घावों पर मरहम लगाने के लिए पहुंचे।
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